April 6, 2026

साहित्य लहर

राजेश ध्यानी “सागर” किसका श्रृंगार करू सुबह का या रात का किसका इन्तजार करू वफ़ा या बेफ़वाई...
कविता नन्दिनी रक्षित हिमगिरि से, सागर से प्यारा हिन्दुस्तान है जिसके वीर सपूतों का गौरवशाली बलिदान है।।...
सिद्धार्थ गोरखपुरी शिव का रंग चढ़ने लगा है शिवाला भी सजने लगा है भोले बाबा का गाना...
सिद्धार्थ गोरखपुरी वक्त कभी हालात नहीं समझता इश्क! मजहब, उमर, जात नहीं समझता खुदा की नजर में...
राजेश ध्यानी ‘सागर’ स्यां घसेरी बोलि नी ग्यें शांनि कै ग्ये आंख्यू ना भोंल़ ओंल़ घास ली...
राजेश ध्यानी ‘सागर’ जिदंगी इतनी पिलादे यार मैं सो ना सकूं जिसको सींने से लगाया वो खांमोश...
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