सुनील कुमार मुरली वाले हम भक्त तुम्हारे, बेआस-बेसहारे लो हम तो आ गए अब शरण में तुम्हारे...
साहित्य लहर
सिद्धार्थ गोरखपुरी एक उम्र खरच कर कुछ न मिला तुमको क्या पता सचमुच न मिला क्या हुआ...
राजीव कुमार झा बरसात के दिन ठंडी फुहारों से खुशियां लुटाते सबको खूब भाते जंगल में हाथी...
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा भेड़िए कविता सुना रहे हैं, गिद्ध के सिर पर सजे ताज पर और...
सुनील कुमार माथुर हे मेरे कान्हा ! हे मेरे कृष्ण कन्हैया !! अब तुझ जैसे नटखट बच्चे...
नितिन बिष्ट कभी इन घरों में लोग रहा करते थे एक पूरा परिवार एक पूरा गाँव बसा...
राजेश ध्यानी सागर ये कौन रुलाना सिखा गया , दिन बोलें मैं रात हूं। अपना है या...
संजना तिरंगे में केसरिया रंग आता है , जो त्याग और बलिदान की भावना बढ़ाता है ।...
विशाल शुक्ल, छिंदवाड़ा मेरे देश का ध्वज शिव अपने सर पे लहराए बांध तिरंगा चंद्रभाल पे तन...
नाम श्वेता सिंह मन मंझदार सा बहता रहा कभी इस सोच में कभी उस सोच में चलता...














