राजेश ध्यानी शाम बोली रात से ? अब मेरा दिवाना आयेंगा , रात कहें शांम से मेरा...
साहित्य लहर
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा जब प्रातः बेला में चिड़ियां गाती हैं कलियां खिलकर फूल बन जाती हैं...
सुनील कुमार माथुर आओं ऐसा दीप जलाएं जहां घोर अंधकार छाया हो अंहकार , घमंड , राग...
सुनील कुमार माथुर हर चेहरे पर मधु मुस्कान हो हर झौपड पट्टी और हर घर आंगन में...
सुनील कुमार माथुर दीपावली के इस पावन अवसर पर इतने मंहगे पटाके क्यों छोड रहे हो पटाखें...
राजीव कुमार झा सबके घर को चांद ने खुशियों से भर दिया अंधेरे आकाश में जब चांद...
नवाब मंजूर और बढ़ाओ और बढ़ाओ पाई एक भी नहीं घटाओ विरोधियों खूब चिल्लाओ चाहे जितना जोर...
राजेश ध्यानी बहुत पी ली यार उसे भुलानें के लिये बहुत जी ली ज़िन्दगी उसे चाहने के...
राजीव कुमार झा शरद की रात में चांद ने पहनाया धरती के गले में जीवन की माला...
(देवभूमि समाचार) पुष्पा बुकलसरिया आसाम के डिब्रूगढ़ शहर की हिंदी कवयित्री हैं और इनके कविता संग्रह काव्य...














