राजेश ध्यानी सागर एक पतंग कट कर गिरी थोड़ा सा मांजा लिये कई हाथ दौड़े पाने को...
साहित्य लहर
अजय एहसास थाम लो हाथ यार, मेरे जाने से पहले । बोलो करते हो प्यार, मेरे जाने...
राजीव कुमार झा समंदर का किनारा यहां संध्या में उगा तारा रात का चांद जंगल के पास...
राजीव कुमार झा प्यार का वह दिन सही सलामत रहे यादगारे जिंदगानी सफर ए मुहब्बत सबकी बयानी...
राजीव कुमार झा सबकी याद कल शहर से लौटते आयी किसी के शादी की शहनाई दोपहर में...
सुनील कुमार माथुर मकडी ने जाला बनाकर उसमें कीड़े मकोडो को फंसाकर अपना भोजन बनाया कलमकारों ने...
व्यग्र पाण्डे मेरे गाँव की माटी ऐसा तुझमें क्या है मैं जब भी आता तेरे पास होता...
राजीव कुमार झा तुम्हारे पास मेरा कुछ भी नहीं है आज शाम उदास खड़ी है तुम चांद...
राजेश ध्यानी सागर मैने आंसुओं को पढ़ना सीखा है। पर मेरे लिए कोई गिराता नहीं। हंसी तो...
सिद्धार्थ गोरखपुरी तेरे ही दिल में अबतक है मेरा बोरिया -बिस्तर ठहराव प्रिये तब भी क्यों होता...














