कविता : कोई बात नहीं, उनके रोशन हुए चिराग कोई बात नहीं, दीपक है अंधेरे में कोई...
साहित्य लहर
लघुकथा : धर्म, और यह क्या…? नेताजी का जुमला चल निकला । जनता पिछले पांच सालों के...
कविता : नन्हे बच्चे… जरा सा बड़े हुए कि नहीं ये आंगन की किलकारी दोस्त खुद बनाते...
कविता : दो सखियाँ और एक कहानी… फिर झटक कर हर झिझक को काटती और चीरती तलवार...
कविता : श्रद्धांजलि… राष्ट्र के प्रति देश प्रेम, लाल तुम धरती के, तुम हो गर्व मेरे माथ...
कविता : इंकलाब जिंदाबाद… स्वतंत्रता सबके गले का हार हो, देश की हर नारी गंगा की धार...
कविता जीवन का आदिम संगीत है… कबीर को सामाजिक चेतना का कवि कहा जाता है। हिंदी में...
गीत : गरीबी… भविष्य के भरोसे रात गुजर जाती है, जिंदगी एक बार फिर से मुकर जाती...
कविता : जिंदगी एक रंगमंच… कब क्या हो जाए जीवन में यह कोई नहीं कह सकता रब की...
कविता : चढ़ावा… वो जो बेटे को ऊंची अफ़सर की कुर्सी पर बैठने के जागते हुए सपने देखता...














