संजना तन्हा दिल है न जाने कब से , तुम मिलकर भी न मिल पाए। तन्हा है...
साहित्य लहर
सुनील कुमार वंदन-नमन-अभिनंदन बारम्बार करते हैं मां भारती को हम प्रणाम करते हैं। ज्ञान-ध्यान का दीप जला...
नवाब मंजूर आती बारी सबकी बारी बारी बारी! भेद न इसमें म्हारी थारी। निकले पल में- सारी...
सुनील कुमार उम्मीद छोड़ चुके लोगों में भी उम्मीद की किरण जगाते हैं अपनों से भी ज्यादा...
राजीव डोगरा मैं लिख रहा हूं तुमको तुम पढ़ लेना खुद को अगर न समझ आये कुछ...
सुनील कुमार घुट रहा है दम मेरा शहर की इन फिजाओं में अब सुकून भरी छांव चाहता...
सुनील कुमार माथुर देखो इस संसार में चारों ओर कलह है पिता पुत्र में, सास बहू में...
सुनील कुमार मीत मेरे बचपन के जाने कहां खो गए छोड़ गांव की गलियां शहर की भीड़...
मो. मंजूर आलम “नवाब मंजूर” है कहना कठिन बहुत बुरा गुजरा हर शय हर चमन उजड़ा कल...
विनोद सिंह नामदेव “शजर शिवपुरी” अश्क़ आँखों में भर गया कोई। देश पर फिर से मर गया...














