- दीपावली पर गरीबों के घर भी जलाएं खुशियों के दीप
- दूसरों के चेहरों पर मुस्कान लाकर मनाएं दीपोत्सव
- फिजूलखर्ची नहीं, जरूरतमंदों की मदद से सार्थक होगी दीपावली
- मन का अंधकार मिटाकर दूसरों के जीवन में रोशनी फैलाएं
सुनील कुमार माथुर
33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान
दीपावली दीपों का त्योहार है। आनंद, उत्साह और उमंग का त्योहार है। रोशनी और प्रकाश का त्योहार है। इसलिए केवल बाहरी साफ-सफाई करना ही पर्याप्त नहीं है। हम इस त्योहार पर मन की पवित्रता को बनाए रखते हुए किसी गरीब की झोपड़ी पर कम से कम 11 दीपक जलाएं, उनके बच्चों को स्वादिष्ट व्यंजन, मिठाई या एक-एक नए वस्त्र पहनने को दें और उनके चेहरे पर खुशियां लाएं, तो बेहतर होगा।
दीपावली के नाम पर बेकार की फिजूलखर्ची करने से कोई लाभ नहीं होगा। जब तक हम दूसरों के जीवन में खुशियों का संचार न कर दें, तब तक दीपोत्सव मनाने का कोई औचित्य नहीं है। मन के भीतर का अंधकार मिटाएं, तभी दीपोत्सव मनाने की सार्थकता है। अन्यथा यह त्योहार मात्र औपचारिकता बनकर रह जाएगा।
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