- मन की निर्मलता से जलता है सेवा और सद्भाव का दीपक
- ईश्वर पर डर नहीं, भरोसा रखकर करें अच्छे कर्म
- धन से बढ़कर अनमोल है मन की शांति
- सकारात्मक सोच, निस्वार्थ सेवा और संतोष ही सुखी जीवन का आधार
सुनील कुमार माथुर
33, वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान
निस्वार्थ सेवा का आनंद प्रशंसा से नहीं, अपितु मन की निर्मलता से मिलता है। जब हम किसी के जीवन में थोड़ा प्रकाश बनते हैं, तो हमारे भीतर भी एक दीपक जल उठता है। यह दीपक आत्मविश्वास, श्रद्धा और भरोसे का होता है, जो तभी प्रज्वलित होता है जब हमारे मन में किसी के भी प्रति राग-द्वेष, ईर्ष्या व बदले की भावना न हो और मन गंगा की तरह पवित्र हो। ऐसा मन का भाव तभी बनता है, जब हमारी सोच सकारात्मक होगी। अन्यथा इस मन का क्या भरोसा? एक ही पल में अनेक विचारों का आदान-प्रदान होता रहता है, लेकिन जब हमारी सोच सकारात्मक होगी, तब मन में ऐसे विचारों का आगमन होगा, जो जनहितकारी व जनकल्याणकारी हों। तभी मन में जनकल्याण का दीपक स्वतः ही प्रज्वलित होता है।
डर व भरोसा
किसी को डर है कि ईश्वर देख रहा है और किसी को भरोसा है कि ईश्वर देख रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि जो व्यक्ति गलत कार्य करता है, उसके मन में सदैव यह डर बना रहता है कि कोई और देख रहा है या नहीं, लेकिन ईश्वर अवश्य ही देख रहा है। फिर भी वह न जाने क्यों अपने मन के विपरीत जाकर गलत कार्य कर बैठता है।
इससे भले ही उसे कुछ क्षण के लिए, कुछ पल, घंटों, दिनों, महीनों, वर्षों तक लाभ मिल जाए या इच्छाओं की पूर्ति हो जाए, लेकिन ईश्वर उसे कभी माफ नहीं करता है। चाहे उसने किसी भी परिस्थिति के कारण गलत कार्य क्यों न किया हो, लेकिन कर्मों का फल अवश्य ही भोगना पड़ता है। दूसरी ओर ऐसा व्यक्ति भी है, जो ईश्वर पर भरोसा करके अपने कार्य करता है। जिन व्यक्तियों का ईश्वर पर भरोसा होता है, उनका ईश्वर हमेशा बेड़ा पार लगाता है।
मन की शांति
मन की शांति से बढ़कर इस दुनिया में कोई भी दौलत कीमती नहीं है। फिर भी इंसान दिन-रात हाय धन, हाय धन कर रहा है। वह न जाने किसके लिए इतना धन इकट्ठा कर रहा है। परमात्मा ने हमें हमारी जरूरत के मुताबिक सुख-सुविधाएं दे रखी हैं, फिर भी हम संतुष्ट नहीं हैं। इच्छाओं को सीमित रखिए और आराम की जिंदगी जीएं। इच्छाओं को आप जितना बढ़ाएंगे, उतने ही दुखी रहेंगे। चूंकि इंसान बड़ा ही लालची है। एक इच्छा पूरी नहीं होती है कि दूसरी मुंह बाए खड़ी हो जाती है। अतः इच्छाओं पर अंकुश लगाइए और सुख की जिंदगी जीएं।
मन की शांति, मन के भीतर का दीपक, निस्वार्थ सेवा का महत्व, ईश्वर पर भरोसा, सकारात्मक सोच के फायदे, जीवन में आत्मविश्वास, मन की निर्मलता, इच्छाओं पर नियंत्रण, सुखी जीवन के उपाय, सुनील कुमार माथुर



1 thought on “मन का दीपक, ईश्वर पर भरोसा और शांति का महत्व”