नशे की रोकथाम में सेलिब्रिटी, खिलाड़ी, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और सार्वजनिक व्यक्तित्वों की लोकप्रियता के साथ उनकी नैतिक जिम्मेदारी भी जुड़ी है। लेख में बताया गया है कि सार्वजनिक व्यक्तित्व नशे को आकर्षक या सामान्य बनाने के बजाय नशामुक्त जीवनशैली, उपचार, पुनर्वास और स्वस्थ विकल्पों को बढ़ावा देकर युवाओं पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। साथ ही, जागरूकता अभियानों को निरंतर कार्रवाई, परामर्श, उपचार, सामुदायिक सहयोग और युवाओं की सक्रिय भागीदारी से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
- युवाओं को नशे से बचाने में सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी
- नशामुक्त समाज के लिए मिले सकारात्मक संदेश
- सेलिब्रिटी प्रभाव बने नशामुक्ति की ताकत
- नशे के खिलाफ जागरूकता से आगे बढ़कर कार्रवाई जरूरी
डॉ. प्रियंका सौरभ
सेलिब्रिटी और सार्वजनिक व्यक्तित्व समाज में एक विशेष प्रभाव रखते हैं। उनके शब्दों, व्यवहार और जीवनशैली को मीडिया तथा सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से लोगों तक पहुँचाया जाता है, जिससे वे विशेषकर युवाओं के लिए प्रभावशाली आदर्श बन जाते हैं। यह लोकप्रियता केवल अवसर ही नहीं देती, बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी भी पैदा करती है। नशे की लत आज स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक समरसता के लिए गंभीर चुनौती है। सामाजिक प्रभाव का अर्थ दूसरों के विचारों, दृष्टिकोण और व्यवहार को प्रभावित करने की क्षमता से है। फिल्म कलाकारों, खिलाड़ियों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, अधिकारियों और अन्य सार्वजनिक व्यक्तित्वों का प्रभाव मनोरंजन या प्रशासन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि तब नैतिक जिम्मेदारी का रूप ले लेता है, जब वह नशीले पदार्थों के सेवन जैसे जीवन को प्रभावित करने वाले निर्णयों पर असर डालता है। जब सार्वजनिक व्यक्तित्व गीतों, फिल्मों, सोशल मीडिया पोस्ट या व्यक्तिगत आचरण के माध्यम से नशे को सामान्य या आकर्षक रूप में प्रस्तुत करते हैं, तो इससे युवाओं में यह संदेश जा सकता है कि नशा स्वीकार्य, आधुनिक या सफलता का आसान रास्ता है। इसके विपरीत, जब वे नशामुक्त जीवनशैली को अपनाते हैं, नशे के खिलाफ बोलते हैं और पुनर्वास का समर्थन करते हैं, तो वे नशे को मना करना सामाजिक रूप से सम्मानजनक विकल्प बनाने में मदद कर सकते हैं।
युवा अक्सर उन्हीं लोगों का अनुकरण करते हैं, जिन्हें वे अपना आदर्श मानते हैं। ऐसे खिलाड़ी जो फिटनेस, अनुशासन और नशामुक्त जीवनशैली पर जोर देते हैं, वे युवाओं के सामने तत्काल आनंद और नशे की संस्कृति का एक सकारात्मक विकल्प प्रस्तुत करते हैं। जब खिलाड़ी, फिटनेस इन्फ्लुएंसर और सेलिब्रिटी खुले तौर पर नशे को अस्वीकार करते हैं, तो स्वस्थ जीवनशैली युवाओं के लिए आकर्षक बनती है। नशामुक्ति से जुड़े विभिन्न अभियानों में फिल्म कलाकारों और खेल जगत की हस्तियों की भागीदारी ने युवाओं को स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन चुनने का संदेश दिया है। ऐसे संदेश इसलिए प्रभावशाली हो सकते हैं क्योंकि वे उन व्यक्तियों की ओर से आते हैं, जिन्हें युवा पहले से पसंद और सम्मान करते हैं। सेलिब्रिटी इस धारणा को भी चुनौती दे सकते हैं कि “हर कोई नशा करता है” या नशा केवल युवावस्था का सामान्य अनुभव है। नशामुक्त भारत अभियान जैसे प्रयासों से जुड़कर सार्वजनिक व्यक्तित्व नशे को जीवनशैली के बजाय एक गंभीर स्वास्थ्य और सामाजिक चुनौती के रूप में देखने की समझ विकसित करने में योगदान दे सकते हैं। कई सार्वजनिक अभियानों में परिवार के भीतर खुलकर बातचीत करने और नशे से प्रभावित लोगों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार अपनाने पर भी जोर दिया गया है।
साथियों का दबाव अक्सर युवाओं को नशे के प्रयोग की ओर धकेलता है। जब लोकप्रिय व्यक्तित्व अपने मंचों के माध्यम से नशामुक्त जीवन को प्रोत्साहित करते हैं, तो वे सामाजिक सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान दे सकते हैं। सोशल मीडिया अभियान, डिजिटल शपथ, जागरूकता कार्यक्रम और युवाओं के नेतृत्व वाले आंदोलनों को सेलिब्रिटी समर्थन मिलने से नशामुक्ति एक सामूहिक सामाजिक संदेश बन सकती है। प्रभावशाली नेतृत्व के साथ संचालित योजनाबद्ध अभियानों के माध्यम से बड़ी संख्या में युवाओं को जोड़ा जा सकता है। नशे की समस्या अक्सर चुप्पी और शर्म के कारण और गंभीर हो जाती है। सार्वजनिक व्यक्तित्व जब अपने या दूसरों के नशामुक्ति के अनुभवों के बारे में खुलकर बात करते हैं, तो वे नशे की समस्या से जूझ रहे लोगों को केवल दोषी या अपराधी मानने के बजाय सहायता और उपचार की आवश्यकता वाले व्यक्ति के रूप में देखने की सोच विकसित कर सकते हैं। इससे सामाजिक कलंक कम हो सकता है और परिवार प्रभावित व्यक्ति को समय रहते उपचार दिलाने के लिए आगे आ सकते हैं। रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, विशेषज्ञों की चर्चाओं और जागरूकता अभियानों को एक साथ जोड़ने वाले प्रयास नशे की रोकथाम और पुनर्वास को सामुदायिक जिम्मेदारी बनाने में मदद कर सकते हैं।
हालाँकि केवल जागरूकता पर्याप्त नहीं है; उसे ठोस और निरंतर कार्रवाई में बदलना भी आवश्यक है। प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय नेतृत्व सेलिब्रिटी प्रभाव का उपयोग दीर्घकालिक नशामुक्ति अभियानों के निर्माण में कर सकते हैं। प्रभावी अभियानों में जागरूकता के साथ कानून का पालन, उपचार, पुनर्वास और युवाओं की सक्रिय भागीदारी को भी शामिल किया जाना चाहिए। खेल, संस्कृति और विद्यालयों से जुड़ी गतिविधियाँ युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए सकारात्मक विकल्प उपलब्ध करा सकती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि नैतिक नेतृत्व केवल एक-दो भाषणों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि ऐसा वातावरण तैयार करना चाहिए जिसमें युवाओं को शिक्षा, खेल, मनोरंजन, परामर्श और सकारात्मक मित्र समूहों के माध्यम से बेहतर विकल्प मिल सकें। प्रशासनिक अधिकारी राज्य के प्रतिनिधि होने के कारण व्यापक सामाजिक प्रभाव रखते हैं। जब वे विद्यार्थियों और समुदायों को नशे के खिलाफ एक साझा उद्देश्य से जोड़ते हैं, तो यह संदेश मजबूत होता है कि युवाओं को नशे से बचाना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जब प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस, शिक्षक और सेलिब्रिटी मिलकर काम करते हैं, तो संदेश को भावनात्मक प्रभाव के साथ संस्थागत समर्थन भी मिलता है।
इन प्रयासों के बावजूद कई चुनौतियाँ बनी हुई हैं। फिल्मों, संगीत वीडियो और ओटीटी सामग्री में कभी-कभी नशे को आकर्षक, विद्रोही या आधुनिक जीवनशैली के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जिससे नशामुक्ति के संदेश कमजोर पड़ सकते हैं। जब नशामुक्त जीवन का संदेश देने वाले सार्वजनिक व्यक्तित्व स्वयं नशे से जुड़े विवादों में दिखाई देते हैं, तो जनता का विश्वास प्रभावित हो सकता है और युवा नशामुक्ति अभियानों को केवल दिखावा मानने लग सकते हैं। जागरूकता अभियानों की पहुँच भी समान नहीं है। शहरी और अंग्रेजी बोलने वाले युवाओं तक अभियान अपेक्षाकृत अधिक पहुँच सकते हैं, जबकि ग्रामीण और वंचित वर्गों के युवा पर्याप्त रूप से इससे जुड़ नहीं पाते। केवल एक दिन की रैली या शपथ का प्रभाव लंबे समय तक बनाए रखना कठिन है, यदि उसके साथ परामर्श, उपचार, पुनर्वास और सामुदायिक सहयोग की व्यवस्था न हो। व्यावसायिक हित और विज्ञापन समझौते भी कभी-कभी सार्वजनिक व्यक्तित्वों को नशे जैसे संवेदनशील विषयों पर स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाने से रोक सकते हैं।
सामाजिक प्रभाव को नैतिक नेतृत्व में बदलने के लिए सार्वजनिक व्यक्तित्वों और प्रशासनिक अधिकारियों को प्रतीकात्मक गतिविधियों से आगे बढ़कर निरंतर और विश्वसनीय प्रयास करने होंगे। सेलिब्रिटी को ऐसे अभियानों का समर्थन करना चाहिए जो लंबे समय तक चलें और जिनमें उनके संदेश तथा व्यक्तिगत आचरण के बीच निरंतरता दिखाई दे। उन्हें ऐसी सामग्री के प्रति भी सावधान रहना चाहिए जो अनजाने में नशे को आकर्षक बना सकती है और जहाँ आवश्यक हो, वहाँ उचित स्वास्थ्य संबंधी संदेशों को बढ़ावा देना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों को जागरूकता के साथ परामर्श, उपचार और पुनर्वास की व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि कानून के पालन के साथ प्रभावित लोगों को सुधार और समाज में पुनः स्थापित होने का अवसर मिले। सोशल मीडिया का उपयोग सकारात्मक प्रभाव के लिए किया जा सकता है। इन्फ्लुएंसर नशामुक्ति की वास्तविक कहानियाँ साझा कर सकते हैं, स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा दे सकते हैं और प्रमाणित हेल्पलाइन तथा उपचार संबंधी जानकारी युवाओं तक पहुँचा सकते हैं। संस्थाओं को भी नशे से संबंधित मीडिया और डिजिटल सामग्री के लिए उचित नैतिक दिशानिर्देश विकसित और प्रभावी रूप से लागू करने चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि युवाओं को केवल जागरूकता अभियानों का लक्ष्य न बनाकर उनका सहभागी बनाया जाए। विद्यार्थी स्वयं अभियान तैयार कर सकते हैं, सहपाठी समूहों का नेतृत्व कर सकते हैं और नशामुक्ति की नीतियों तथा कार्यक्रमों पर संवाद में भाग ले सकते हैं। इससे नशे की रोकथाम की रणनीतियाँ युवाओं की वास्तविक परिस्थितियों और समस्याओं से अधिक जुड़ सकेंगी।
सामाजिक प्रभाव तब नैतिक नेतृत्व में बदलता है, जब सार्वजनिक व्यक्तित्व अपनी लोकप्रियता और पहुँच का उपयोग स्वस्थ, जिम्मेदार और जागरूक विकल्पों को प्रोत्साहित करने के लिए करते हैं। नशे के खिलाफ संघर्ष में सेलिब्रिटी, इन्फ्लुएंसर, खिलाड़ी और प्रशासनिक अधिकारी केवल संदेशवाहक नहीं हैं; उनका सार्वजनिक व्यवहार नशे और नशामुक्ति के प्रति समाज की सोच को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उनका नैतिक दायित्व है कि वे अपनी लोकप्रियता, अधिकार और प्रभाव का उपयोग सकारात्मक दिशा में करें। उद्देश्य केवल तालियाँ या प्रचार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए, बल्कि जागरूकता बढ़ाना, सामाजिक कलंक कम करना, उपचार को प्रोत्साहित करना और युवाओं को स्वस्थ एवं नशामुक्त भविष्य की ओर प्रेरित करना होना चाहिए।
(डॉ. प्रियंका सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), कवयित्री एवं सामाजिक चिंतक हैं।)
डॉ. प्रियंका सौरभ
पीएचडी (राजनीति विज्ञान)
कवयित्री | सामाजिक चिंतक | स्तंभकार
उब्बा भवन, आर्यनगर हिसार (हरियाणा)

