निठारी कांड के सह आरोपी सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में कमरे के अंदर फंदे से लटका मिला था, जिसके बाद अल्मोड़ा से पहुंचे परिजनों और परिचितों ने घटना को लेकर सवाल उठाए हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने इसे आत्महत्या मानने पर संदेह जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। हालांकि पुलिस सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम में शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है।
- सुरेंद्र कोली की मौत, परिजनों ने उठाए सवाल
- फंदे से मिला शव, परिजनों ने जताया संदेह
- सुरेंद्र कोली की मौत की जांच पर टिकी नजर
- पोस्टमार्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज
हरिद्वार। निठारी कांड के सह आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई मौत को लेकर अब कई सवाल उठ रहे हैं। शुक्रवार को उसका शव एक कमरे में फंदे से लटका मिला था। घटना की जानकारी मिलने के बाद शनिवार को अल्मोड़ा से उसके परिजन और परिचित हरिद्वार पहुंचे। परिजनों की ओर से घटना की परिस्थितियों को लेकर संदेह जताया गया और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
सुरेंद्र का शव लेने हरिद्वार पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने मीडिया के सामने घटना को लेकर कई सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कमरे की स्थिति और शव को देखने के बाद उन्हें यह मामला सामान्य आत्महत्या जैसा नहीं लगा। रावत ने घटना की गहन और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये दावे परिजनों और उनके परिचितों की आशंकाओं पर आधारित हैं तथा मामले की अंतिम स्थिति जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।
परिजनों ने घटना को लेकर जताया संदेह
नारायण सिंह रावत के अनुसार, सुरेंद्र जिस जगह मिला, वह करीब सात फीट का खोखा था। उन्होंने रस्सी में दो गांठ होने और शव की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों के आधार पर उन्हें घटना संदिग्ध लगती है। उन्होंने आशंका जताई कि किसी घटना के बाद इसे आत्महत्या का रूप दिया गया हो सकता है।
रावत ने यह भी दावा किया कि सुरेंद्र के नाक और मुंह से खून आने की बात सामने आई थी तथा खोखे का शटर खुला हुआ था। इन्हीं परिस्थितियों का हवाला देते हुए उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसी साजिश की आशंका जताई और निष्पक्ष जांच की मांग की। ये सभी बातें रावत द्वारा मीडिया के सामने रखी गई आशंकाएं और दावे हैं; इनकी स्वतंत्र पुष्टि या पुलिस की ओर से पुष्टि इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है।
20 साल तक चली कानूनी लड़ाई का भी जिक्र
सुरेंद्र कोली के परिचितों ने उसकी करीब 20 वर्षों तक चली कानूनी लड़ाई का भी उल्लेख किया। नारायण सिंह रावत के मुताबिक, सुरेंद्र ने खुद को निर्दोष साबित करने के लिए लंबे समय तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2023 में 12 मामलों में उसे बरी किया था और नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम मामले में भी उसे बरी कर दिया था।
रावत ने कहा कि इतने लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुरेंद्र के सामने सामाजिक और आर्थिक जीवन में दोबारा खड़े होने की चुनौती थी। उन्होंने परिवार की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का भी उल्लेख किया।
पोस्टमार्टम में चोट के निशान नहीं मिले
दूसरी ओर, पुलिस सूत्रों के मुताबिक सुरेंद्र कोली के शव का चिकित्सकों के पैनल ने वीडियोग्राफी के बीच पोस्टमार्टम किया। डॉ. रजत सैनी और डॉ. अनस के पैनल द्वारा किए गए पोस्टमार्टम के बाद पुलिस सूत्रों ने बताया कि शरीर पर किसी तरह के चोट के निशान नहीं मिले हैं। नाक से खून आने की बात पर चिकित्सकों की रिपोर्ट भी तैयार की जानी है। कोली के कपड़े सील कर दिए गए हैं।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी नजर
पोस्टमार्टम के बाद सुरेंद्र कोली का शव उसके बेटे, तीन भाइयों और परिचित पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को सौंप दिया गया। इसके बाद परिजनों ने हरिद्वार के खड़खड़ी श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया। अब मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी, जिससे मौत की परिस्थितियों को लेकर सामने आए सवालों पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल एक ओर परिजनों और परिचितों की ओर से घटना को लेकर संदेह जताया गया है, जबकि दूसरी ओर उपलब्ध पुलिस सूत्रों की जानकारी में शरीर पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिलने की बात सामने आई है। मौत का वास्तविक कारण और घटना की परिस्थितियां आधिकारिक जांच तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही स्पष्ट होंगी।

