
यह भक्तिपूर्ण कविता भगवान श्रीगणेश की स्तुति और आराधना को समर्पित है। इसमें उन्हें विघ्नहर्ता, बुद्धिदाता, रिद्धि-सिद्धि के दाता और प्रथमपूज्य देव के रूप में स्मरण करते हुए उनकी कृपा की कामना की गई है।
- जय-जय श्रीगणेश
- विघ्नहर्ता श्रीगणेश
- गणनायक की आराधना
- प्रथमपूज्य श्रीगणेश
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
जय-जय श्रीगणेश,
मूषक वाहन, गजमुख,
दर्शन शुभ-सुख।
रिद्धि-सिद्धि दाता,
लड्डू भोग लगाता।।
जय-जय श्रीगणेश,
सर्व विघ्नहर्ता,
शुभ मंगल कर्ता।
शिवसुत बुद्धिदाता,
प्रथमपूज्य वरदाता।।
जय-जय श्रीगणेश,
गणनायक देवा,
स्वीकार करो सेवा।
मां पार्वती के प्यारे,
सबके राजदुलारे।।
जय-जय श्रीगणेश,
तुम्हीं सर्व सहारा,
लगा जय-जयकारा।
प्रभु छवि उजियारी,
शुभ मंगलकारी।।
– मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर,
फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश – 283111
मो. 9627912535









