
सफलता हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास का होना आवश्यक है। जीवन के उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए और सफलता मिलने पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए। प्रतिभा का उपयोग जन-जन के हित में करना ही सफलता को सार्थक बनाता है।
- आत्मविश्वास और मेहनत से मिलती है सफलता
- सफलता के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति जरूरी
- मेहनत, आत्मविश्वास और सफलता का सफर
- सफलता मिले तो अहंकार से बचें
सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
जीवन में आप किसी भी क्षेत्र में चले जाइये, सफलता पाने के लिए कड़ी मेहनत, अनुशासन, दृढ़ इच्छाशक्ति का होना नितांत आवश्यक है। सफलता पाने के लिए आत्मविश्वास भी होना चाहिए। चूंकि हमें आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास ही सही दशा व दिशा दिखाता है। वरना सफलता प्राप्त करना बड़ा ही कठिन कार्य है। कहा भी जाता है कि सफलता उन्हीं के चरण छूती है जो कड़ी मेहनत करते हैं और हर क्षण कुछ नया कर गुजरने की तमन्ना रखते हैं। हर व्यक्ति वैसे भी प्रतिभाशाली होता है, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति के अभाव में वह प्रगति की सीढ़ियां नहीं चढ़ पाता है। अतः ऐसे लोगों के लिए सफलता हासिल करना मुश्किल हो जाता है। हमारे बड़े बुजुर्गों का कहना है कि आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत ही वह मूल मंत्र है जो हमें सदैव सफलता दिलाते हैं। एक तरह से वे हमारे सच्चे मार्गदर्शक हैं। इसी वजह से हम आत्मविश्वास और कड़ी मेहनत के प्रति नतमस्तक हैं।
जीवन में उतार-चढ़ाव आते ही रहते हैं, जिससे घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। हर नया काम शुरू करते वक्त डर लगता है कि कहीं काम बिगड़ न जाये, कोई नुकसान न हो जाये, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम कोई नया काम शुरू करें ही नहीं। यह समस्या तो हर किसी के दिमाग में आती है। आखिर कोई न कोई पहल करता ही है और जब पहली बार में ही सफलता प्राप्त हो जाती है, तब कितनी खुशी होती है और फिर मीडिया हमारे हुनर का डंका देश-विदेश तक पहुंचा देता है। इसलिए कहा गया है कि युवा शक्ति अपनी ताकत को पहचाने और अपनी कमजोरियों से भी प्रेरणा लें कि हम कहां गलत थे या कमजोर पड़ गये थे।
प्रायः देखा गया है कि लोग सफलता पाकर घमंड करने लगते हैं, लेकिन कभी भी सफलता हासिल कर घमंड नहीं करना चाहिए। हमारा अहंकार हमें आगे बढ़ने से रोकता है और फिर मंजिल छूट जाती है। सफलता हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है और यही कारण है कि हमें मेहनत करने से कभी भी मुंह नहीं मोड़ना चाहिए। केवल प्रतिभाशाली होने से काम नहीं चलने वाला है, अपितु अपनी प्रतिभा से जन-जन को लाभान्वित करने का प्रयास करना चाहिए।
इस नश्वर संसार में भांति-भांति के लोग रहते हैं। उनको आप से लाभ मिलता है तो वे आधी रात को भी आप उनसे कोई जानकारी चाहते हैं तो वे बिना ना-नू किये आपको सारी जानकारी उपलब्ध करा देंगे और एक मिनट की भी देरी नहीं करेंगे, लेकिन जैसे ही स्वार्थ पूरा हुआ कि वे आप से मुंह मोड़ लेंगे। फिर कुछ भी जानकारी मांगिए, वे ना-नू करने लगते हैं। हां, वे सीधे-सीधे मना भी नहीं करते हैं और जानकारी भी नहीं देते हैं। अतः ऐसे स्वार्थी लोग इस नश्वर संसार में दुःख ही पाते हैं, क्योंकि काठ की हांडी एक बार ही आग पर चढ़ती है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच (स्वतंत्र लेखक व पत्रकार)
जोधपुर, राजस्थान








