
राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के लिए ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, रोजगारपरक कौशल, एनसीसी, छात्रवृत्ति एवं शैक्षणिक प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। अतिथियों ने विद्यार्थियों को अनुशासन, निरंतर अध्ययन और व्यक्तित्व विकास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
- मालदेवता महाविद्यालय में नए विद्यार्थियों का भव्य स्वागत
- दीक्षारंभ कार्यक्रम में छात्रों को मिली नई शिक्षा नीति की जानकारी
- उच्च शिक्षा अधिकारियों ने विद्यार्थियों को दिए सफलता के मंत्र
- कौशल विकास और अनुशासन पर रहा दीक्षारंभ कार्यक्रम का विशेष फोकस
देहरादून | राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय मालदेवता (रायपुर), देहरादून में नवप्रवेशित छात्र-छात्राओं के शैक्षणिक जीवन की सशक्त शुरुआत के उद्देश्य से ‘दीक्षारंभ’ कार्यक्रम का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। महाविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में स्नातक प्रथम सेमेस्टर (बीए, बीएससी, बीकॉम एवं बीएससी होम साइंस) के विद्यार्थियों का महाविद्यालय परिवार ने आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विनोद प्रकाश अग्रवाल ने की। उन्होंने विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि महाविद्यालय केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण, ज्ञानार्जन, नैतिक मूल्यों और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण केंद्र है।
उन्होंने छात्रों से नियमित अध्ययन, अनुशासन और सकारात्मक सोच के साथ अपने शैक्षणिक जीवन को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. संगीता गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. ममता ड्यूँडी नैथानी उपस्थित रहीं। दोनों अधिकारियों ने विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण का आधार भी है। उन्होंने छात्रों को अनुशासन, निरंतर परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर रहने की प्रेरणा दी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के संयोजक डॉ. लिंगवाल ने पावर पॉइंट प्रस्तुति (PPT) के माध्यम से विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषताओं से परिचित कराया।
उन्होंने विषय चयन, परीक्षा प्रणाली, एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (ABC Locker) तथा स्टूडेंट लाइफ साइकिल (SLC) की पूरी प्रक्रिया को सरल और चरणबद्ध तरीके से समझाया, ताकि विद्यार्थियों को भविष्य में किसी प्रकार की शैक्षणिक या प्रशासनिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। एनईपी समिति की सदस्य डॉ. डिंपल भट्ट ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक कौशल (Skill Development) विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धी दौर में केवल अकादमिक ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी दक्षता, संचार कौशल और व्यावहारिक अनुभव भी सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
इस अवसर पर डॉ. सुमन सिंह गुसाईं ने सह-पाठ्यक्रम (Co-curricular) गतिविधियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को सांस्कृतिक, साहित्यिक और खेल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। वहीं एनसीसी अधिकारी डॉ. नैनवाल ने राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) से जुड़ने के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि इससे नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, आत्मविश्वास और राष्ट्रसेवा की भावना का विकास होता है। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. यतीश प्रसाद ने अपने प्रेरक संबोधन में विद्यार्थियों से स्वामी विवेकानंद और डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की प्रवृत्ति ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
कार्यक्रम में अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की प्रतिनिधि ने छात्राओं को उपलब्ध वित्तीय सहायता, छात्रवृत्ति योजनाओं तथा आवेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने पात्र छात्राओं से इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी शिक्षा को और अधिक सशक्त बनाने का आग्रह किया। समारोह के समापन पर प्राचार्य डॉ. विनोद प्रकाश अग्रवाल ने विद्यार्थियों को महाविद्यालय की अनुशासन व्यवस्था से अवगत कराते हुए समय पर कक्षाओं में उपस्थित रहने, निर्धारित यूनिफॉर्म पहनने, परिचय पत्र का नियमित उपयोग करने तथा शैक्षणिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता निभाने का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. विनोद शाह ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त प्राध्यापक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नवप्रवेशित छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को नई शिक्षा नीति, शैक्षणिक प्रक्रियाओं, कौशल विकास और महाविद्यालयीन जीवन की उपयोगी जानकारी प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मजबूत आधारशिला रखने का कार्य किया।





