
यह कविता पिता और बच्चे के बीच विश्वास, स्नेह और सीख के रिश्ते को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है। इसमें बचपन के छोटे-छोटे क्षणों, पिता के मार्गदर्शन और नन्हे मन के विश्वास को जीवन की सबसे मूल्यवान पूंजी बताया गया है। कविता यह संदेश देती है कि बचपन की यादें और अपनापन जीवनभर ऊर्जा देते हैं।
- पापा के संग बचपन
- नन्हे कदम, बड़े सपने
- विश्वास की अँगुली
- बचपन का अनमोल साथ
डॉ. सत्यवान सौरभ
नन्हे हाथ जब थाम लें,
मिलता जग का मान।
पापा संग हर मोड़ पर,
खिल उठता अरमान॥
अँगुली पकड़ चलना सीख,
सपनों को दे पंख।
ममता, हिम्मत, मुस्कान से,
महके जीवन-अंक॥
नन्ही आँखों में बसी,
उत्सुकता की धार।
हर पल सीखें देख कर,
दुनिया का व्यवहार॥
पापा की मुस्कान से,
मिट जाए हर डर।
छोटे-छोटे हौसलों से,
जीते ऊँचा घर॥
अँगूठा ऊपर कर कहे,
“सब होगा आसान।”
नन्हे मन का यह भरोसा,
सबसे बड़ी पहचान॥
बचपन के ये अनमोल क्षण,
रखना सदा सँभाल।
कल यही यादें बनेंगी,
जीवन का मधुमाल॥
बचपन सबसे कीमती,
प्रेम अनोखा धन।
पापा-बेटे का स्नेह ही,
जीवन का स्पंदन॥
(डॉ. सत्यवान सौरभ, पीएचडी (राजनीति विज्ञान), एक कवि और सामाजिक विचारक है।)
डॉo सत्यवान सौरभ,
कवि, सामाजिक विचारक एवं स्तंभकार, आकाशवाणी एवं टीवी पेनालिस्ट,
333, परी वाटिका, कौशल्या भवन, बड़वा (सिवानी) भिवानी, हरियाणा








