
ऋषिकेश की एक घटना के बाद सोशल मीडिया पर HR बनाम UK जैसा माहौल बनाने की कोशिश हो रही है। कुछ लोग भड़काऊ पोस्ट के जरिए क्षेत्रवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि असल जरूरत समझदारी, संयम और आपसी सम्मान बनाए रखने की है। समाज और संस्कृति का सम्मान करते हुए भाईचारे के साथ आगे बढ़ना ही बेहतर रास्ता है।
- ऋषिकेश की घटना को क्षेत्रवाद का रंग देना ठीक नहीं
- HR बनाम UK नहीं, भाईचारे की जरूरत
- सोशल मीडिया की भड़काऊ बहसों से बचने की जरूरत
- पहाड़ों की मर्यादा और आपसी सम्मान समझना जरूरी
रवि बिजारनियां
सोशल मीडिया पर इन दिनों ऋषिकेश की एक घटना को लेकर HR बनाम UK जैसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। आज के समय में किसी भी घटना पर भड़काऊ और नेगेटिव पोस्ट डालकर रीच बढ़ाना आसान हो गया है, लेकिन इससे समस्याओं का समाधान नहीं निकलता, बल्कि आपसी वैमनस्य और तनाव बढ़ता है। राहत की बात यह है कि कई समझदार लोग भी सामने आए हैं, जो संतुलित और सकारात्मक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। असल मुद्दा किसी प्रदेश, भाषा या नंबर प्लेट का नहीं, बल्कि व्यवहार और अनुशासन का है।
जब कुछ युवा, चाहे वे किसी भी राज्य से हों, परिवार से दूर घूमने निकलते हैं तो कई बार उत्साह में मर्यादा और अनुशासन भूल जाते हैं। ऐसे में स्थानीय लोग उन्हें रोकेंगे या समझाएंगे, यह स्वाभाविक है। किसी भी जगह जाएँ तो वैसा ही व्यवहार करें जैसा अपने गाँव, शहर और परिवार के बीच करते हैं। घूमना-फिरना, आनंद लेना और दोस्तों के साथ समय बिताना गलत नहीं है, लेकिन धार्मिक स्थलों और गंगा किनारे जैसी आस्था से जुड़ी जगहों की मर्यादा का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। शराब पीने और पार्टी करने के लिए अलग स्थान हैं, आस्था और श्रद्धा के केंद्र नहीं।
पहाड़ों में आएँ तो यहाँ की शांति, प्रकृति और संस्कृति को महसूस कीजिए। यहाँ की पहचान केवल पर्यटन नहीं, बल्कि सभ्यता, संवेदनशीलता और सरल जीवनशैली भी है। कहा भी गया है कि हमारी आज़ादी वहीं तक है, जहाँ से दूसरे की आज़ादी और सम्मान शुरू होता है। जहाँ तक HR नंबर की गाड़ियों को रोकने की बात है, पुलिस किसी भी राज्य की हो, युवाओं से भरी गाड़ियों से पूछताछ कर सकती है। चाहे नंबर HR हो, DL, UP, RJ या UK, यह सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। इसे क्षेत्रवाद या भेदभाव का रूप देना उचित नहीं है।
मेरा व्यक्तिगत अनुभव है कि हरियाणा और उत्तराखण्ड दोनों राज्यों के लोग बेहद मिलनसार और दिल के अच्छे होते हैं। हरियाणा ने खेलों में देश का नाम रोशन किया है, तो उत्तराखण्ड ने सेना, सुरक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कुछ घटनाओं के आधार पर पूरे समाज की छवि तय करना उचित नहीं कहा जा सकता। जरूरत इस बात की है कि HR vs UK जैसी सोच को बढ़ावा देने के बजाय उसे नजरअंदाज किया जाए। प्यार, सम्मान और भाईचारे के साथ आगे बढ़ना ही समाज और देश के हित में है। आखिर अपने ही भाई को कोसने से दूसरे भाई का सम्मान कैसे बढ़ सकता है।
नोट- आलेख को प्रकाशित करने का चयन देवभूमि ने लिया है। जिसे रवि बिजारनियां जी की फेसबुक पोस्ट से कॉपी करके सम्पादित करके प्रकाशित किया गया है। इसका चयन आलेख के नैतिक लेखन, समान व्यवहार और नैतिक संदेश के कारण किया गया है।








