
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में हिमस्खलन को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जिसमें उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों में मध्यम खतरा बताया गया है। डीजीआरई ने लोगों को अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। मौसम में बदलाव और पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है।
- उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ में हिमस्खलन का मध्यम खतरा
- डीजीआरई की चेतावनी: पहाड़ों में अनावश्यक यात्रा से बचें
- मौसम बदलाव के बीच पहाड़ी इलाकों में खतरा बढ़ा
- 3000 मीटर ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन की आशंका
चमोली। Defence Geoinformatics Research Establishment (डीजीआरई) द्वारा उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में हिमस्खलन को लेकर चेतावनी जारी की गई है। इस चेतावनी के तहत राज्य के कई जिलों में खतरे का स्तर निर्धारित किया गया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। जारी बुलेटिन के अनुसार उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा स्तर-दो यानी मध्यम श्रेणी का आंका गया है। इसका अर्थ है कि इन क्षेत्रों में छोटे स्तर के हिमस्खलन की संभावना बनी हुई है, जो यात्रियों और स्थानीय निवासियों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।
इसके अलावा रुद्रप्रयाग और बागेश्वर जिलों में खतरे का स्तर-एक (कम खतरा) बताया गया है, लेकिन यहां भी पूरी तरह से सुरक्षित स्थिति नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम में अचानक बदलाव के चलते इन क्षेत्रों में भी सतर्कता बरतना जरूरी है। डीजीआरई ने विशेष रूप से ऊंचाई वाले इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। पर्वतीय मार्गों पर यात्रा करने वाले पर्यटकों, ट्रेकर्स और स्थानीय लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने को कहा गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार राज्य में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण मौसम में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है। 23 मार्च को उत्तरकाशी, चमोली, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ में बिजली चमकने के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का येलो अलर्ट जारी किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बर्फबारी और तापमान में गिरावट के कारण हिमस्खलन की घटनाएं बढ़ सकती हैं। आने वाले दिनों में 27 मार्च तक प्रदेश का मौसम अस्थिर बना रह सकता है, जिससे जोखिम और बढ़ने की संभावना है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून में अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री कम 27.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 12.6 डिग्री सेल्सियस रहा। पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान में इससे भी अधिक गिरावट देखी गई, जो हिमस्खलन के खतरे को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में से एक है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक जोखिम न लें और मौसम विभाग व संबंधित एजेंसियों की चेतावनियों का पालन करें। खासकर ट्रेकिंग, पर्वतारोहण या ऊंचाई वाले क्षेत्रों में यात्रा करने से पहले पूरी जानकारी और तैयारी सुनिश्चित करना आवश्यक है।






