
यह कविता साइकिल के माध्यम से सादगी, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है। कवि साइकिल को एक सच्ची मित्र के रूप में प्रस्तुत करता है, जो बिना ईंधन के चलकर जीवन में आनंद और उपयोगिता दोनों प्रदान करती है।
- साइकिल: पर्यावरण की सच्ची मित्र
- सादगी भरी सवारी मेरी साइकिल
- स्वास्थ्य और आनंद की साथी साइकिल
- बिना ईंधन की अनमोल सवारी
मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
सरपट-सरपट दौड़ लगाती,
नित व्यायाम खूब कराती।
गाँव-गाँव, गली-गली घुमाती,
मेरी साइकिल खूब सैर कराती।
बिना ईंधन के चलती जाती,
मन मेरा खूब बहलाती।
साथ-साथ बोझा भी उठाती,
मेरी साइकिल खूब सैर कराती।
पर्यावरण की सच्ची मित्र कहाती,
हर तरह के प्रदूषण से दूर रहती।
धीमे-धीमे मंजिल तक पहुँचाती,
मेरी साइकिल खूब सैर कराती।
गुस्सा ये कभी न करती,
हो जाए खराब तो, बोझ न बनती।
मंजिल तक हर हाल में साथ चलती,
मेरी साइकिल खूब सैर कराती।
— मुकेश कुमार ऋषि वर्मा
ग्राम रिहावली, डाक घर तारौली गूजर,
फतेहाबाद, आगरा, उत्तर प्रदेश – 283111
मो.: 9627912535








