
प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नरेन्द्र शर्मा सुमन का बुधवार को निधन हो गया, जिससे साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। साहित्यकारों और सामाजिक संगठनों ने उन्हें एक प्रेरक चिंतक और मानवीय मूल्यों के समर्थक रचनाकार के रूप में याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। अणुव्रत दर्शन और नैतिक मूल्यों पर आधारित उनके साहित्यिक योगदान को सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।
- प्रख्यात साहित्यकार डॉ. नरेन्द्र शर्मा सुमन का निधन
- साहित्य जगत ने खोया एक प्रेरक चिंतक और रचनाकार
- अणुव्रत दर्शन के प्रचारक डॉ. सुमन को श्रद्धांजलि
- साहित्य सृजन की लौ जलाने वाले डॉ. सुमन नहीं रहे
सुनील कुमार माथुर
जोधपुर। ख्यातिप्राप्त साहित्यकार डॉ. नरेन्द्र शर्मा सुमन का बुधवार को निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही साहित्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई। साहित्य, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में सक्रिय रहे डॉ. सुमन के जाने से साहित्यिक दुनिया को अपूरणीय क्षति हुई है। उनके साहित्यिक योगदान और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पित जीवन को याद करते हुए अनेक साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
साहित्यकार सुनील कुमार माथुर ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. सुमन के निधन से साहित्य जगत में जो रिक्तता उत्पन्न हुई है, उसकी भरपाई करना अत्यंत कठिन है। उन्होंने कहा कि डॉ. सुमन ने साहित्य सृजन के क्षेत्र में जो दीप प्रज्ज्वलित किया, उसे उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से जीवन के अंतिम समय तक जलाए रखा। वे केवल एक लेखक ही नहीं बल्कि एक प्रेरक व्यक्तित्व, चिंतक और समाज के मार्गदर्शक थे। उनका बहुआयामी और गरिमामय व्यक्तित्व साहित्य जगत के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
अणुव्रत लेखक मंच के राष्ट्रीय संयोजक जिनेन्द्र कुमार कोठारी ने भी डॉ. सुमन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक और वैचारिक योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि डॉ. नरेन्द्र शर्मा सुमन को अणुव्रत लेखक पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका था। हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषाओं पर समान अधिकार रखने वाले डॉ. सुमन ने अपने साहित्य के माध्यम से मानवीय मूल्यों, नैतिकता और अणुव्रत दर्शन को समाज में स्थापित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
कोठारी ने कहा कि डॉ. सुमन की रचनाओं में सामाजिक जीवन में नैतिकता, व्यवहार की शुद्धता और चरित्र निर्माण का स्पष्ट संदेश मिलता है। उन्होंने अपने साहित्य और विचारों के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का निरंतर प्रयास किया। उनके विचारों और लेखन ने अनेक साहित्यकारों और पाठकों को प्रेरित किया। उन्होंने यह भी बताया कि “अणुव्रत मेरे जीवन की प्रयोगशाला” विषय पर डॉ. सुमन का दिया गया वक्तव्य अणुव्रत लेखक मंच के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और मार्गदर्शक रहा। मंच के कार्यक्रमों और गतिविधियों में उन्होंने सदैव सक्रिय सहयोग दिया, जो हमेशा स्मरणीय रहेगा।
डॉ. नरेन्द्र शर्मा सुमन का साहित्यिक और वैचारिक योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा। उनके निधन से साहित्य जगत ने एक ऐसे रचनाकार और चिंतक को खो दिया है, जिसने अपने लेखन और विचारों के माध्यम से समाज में नैतिकता और मानवीय मूल्यों की ज्योति प्रज्वलित रखने का कार्य किया। साहित्यकारों और उनके शुभचिंतकों ने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिवार को इस कठिन घड़ी में धैर्य और शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।









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