
अजय के पिता की अचानक तबीयत खराब होने पर बड़े अस्पताल में इलाज की जरूरत पड़ी। ऐसे कठिन समय में मोहल्ले की डॉ आरुषि ने हर कदम पर साथ देकर भर्ती से लेकर इलाज तक की पूरी व्यवस्था करवाई। उनकी निस्वार्थ मदद से समय पर उपचार हुआ और अजय के पिता स्वस्थ होकर घर लौट आए।
- कठिन समय में डॉ आरुषि ने बढ़ाया मदद का हाथ
- समय पर उपचार से बची अजय के पिता की जान
- समाजसेवा का उदाहरण बनीं डॉ आरुषि
- मानवीय संवेदनाओं से जुड़ी एक प्रेरक कहानी
सुनील कुमार माथुर
अजय के पिताजी की तबीयत अचानक बहुत खराब हो गई और गॉलब्लैडर में तेज दर्द उठा। उन्हें तुरंत लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन बेहतर उपचार के लिए शहर के बड़े अस्पताल ले जाने की आवश्यकता पड़ी। ऐसे कठिन समय में हमारे मौहल्ले की डॉ आरुषि हमारे लिए देवदूत बनकर सामने आईं। उन्होंने तुरंत डॉक्टर से संपर्क किया और अजय को पिताजी को बड़े अस्पताल में एडमिट करवाया।
अस्पताल में जांच से लेकर भर्ती, औपचारिकताओं से लेकर प्राइवेट कमरे की व्यवस्था तक हर कदम पर वे हमारे साथ मजबूती से खड़ी रहीं। बड़े अस्पताल में उसी दिन प्राइवेट कमरा मिलना बहुत कठिन होता है, लेकिन डॉ आरुषि के अथक प्रयासों से यह भी संभव हो गया और पिताजी का समय पर सही उपचार हो गया। आज पिताजी स्वस्थ होकर घर लौट आए। यह सब उनकी (डॉ आरुषि की) समय पर की गई सहायता और सहयोग का ही परिणाम है।
डॉ आरुषि हमारे समाज का एक गौरव हैं, जो समाज के हर एक व्यक्ति के काम आती हैं और उसके साथ मजबूती से खड़ी रहती हैं। यह हमारे पूरे समाज के लिए गौरव की बात है। आज डॉ आरुषि दीदी जैसे समाजसेवी लोगों की समाज व राष्ट्र को नितांत आवश्यकता है, जो मानवीय संवेदनाओं को समझते हुए कार्य कर रही हैं और दीन-दुखियों की निस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं। वह आज देवदूत बनकर सभी समाज व वर्ग के लोगों के साथ खड़ी हैं, जिस पर सभी को गर्व है।
सुनील कुमार माथुर
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान









Nice
धन्यवाद
डॉ. आरुषि जैसे समर्पित और संवेदनशील समाजसेवियों पर वास्तव में पूरे समाज को गर्व है। उनका निस्वार्थ भाव से किया जा रहा कार्य हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे लोग ही समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की शक्ति रखते हैं। उन्हें साधुवाद और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ।
धन्यवाद