
यह लेख सादा जीवन और शांत मन को जीवन के सच्चे जिगरी दोस्त बताते हुए सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और व्यवहारिक विवेक पर जोर देता है। लेखक समझाते हैं कि स्वार्थपूर्ण दुनिया में सतर्क रहकर मानवीय गुणों को अपनाना ही संतुलित और आदर्श जीवन का आधार है।
- सादा जीवन और शांत मन
- सकारात्मक सोच की शक्ति
- स्वार्थ की दुनिया और सावधानी
- गुणों को मित्र बनाने की सीख
सुनील कुमार माथुर
सादा जीवन और शांत मन दोनों जिगरी दोस्त हैं। यही वजह है कि जब आपका जीवन सादा होता है और मन शांत होता है, तभी मन व मस्तिष्क में सकारात्मक सोच विकसित होती है। व्यक्ति आराम से कुछ नया करने का सोचता है और उस पर गहन चिंतन-मनन कर अपने लक्ष्य को हासिल करता है। हमारी सकारात्मक सोच ही हमारी शक्ति को बढ़ाती है, ताकि हम बिना किसी भय के अपने कार्य को निरंतर संपादित कर सकें और अपनी मंज़िल पा सकें।
सुख-दुःख, अमीरी-गरीबी, रात-दिन, सूर्योदय-उदय, चंद्र उदय, हानि-लाभ—साथ-साथ नहीं रहते। ठीक उसी प्रकार, जब हमारी सोच सकारात्मक होती है, तब मन में किसी भी प्रकार के विकार नहीं आ सकते, क्योंकि शांत मन किसी भी प्रकार की बुराई को मन-मस्तिष्क में स्थान नहीं देता है। यही वजह है कि व्यक्ति को व्यवहार-कुशल रहना चाहिए। कहते हैं कि सच्चे इंसान गलती कर सकते हैं, लेकिन किसी के भी साथ गलत नहीं कर सकते हैं।
लेकिन मतलब की इस दुनिया में किसी को किसी से गरज होती है, तो सौ चक्कर काट लेंगे या फोन कर देंगे, और ज्यों ही स्वार्थ सिद्ध हुआ कि वे आपको धन्यवाद देना तो दूर रहा, फिर आप फोन करें तो भी वे आपका फोन नहीं उठाने वाले हैं। अतः इस मतलब की दुनिया में सावधान रहें और सतर्क रहें। आप भी “ना” कहना सीखें। तभी आप समझ पाएँगे कि कौन अपना है और कौन पराया। क्योंकि अपने लोग कभी भी गोलमाल बात नहीं करते हैं, वे सदैव स्पष्ट बात कहते हैं। मगर हम अपने स्वभाव के कारण उनकी स्पष्ट बात का गलत अर्थ लगा लेते हैं, और जब हकीकत से अवगत होते हैं, तब तक काफ़ी देर हो चुकी होती है और फिर केवल पछतावा ही रहता है।
जिगरी दोस्त से तात्पर्य केवल इंसान से ही नहीं है, अपितु करुणा, दया, ममता, वात्सल्य, प्रेम, संयम, सहनशीलता, धैर्य, त्याग जैसे गुणों को भी जिगरी दोस्त बनाना चाहिए। तभी हम नकारात्मक सोच से दूर रहकर आदर्श और संयमी जीवन व्यतीत कर पाएँगे। आप न केवल अच्छा सोचें, बल्कि उस अच्छी सोच को व्यवहार में भी उतारें। इसी के साथ आत्मविश्वास बनाए रखें। आत्मविश्वास ही वह ताकत है, जो हमें कभी भी कमजोर नहीं पड़ने देती है और व्यक्ति अपनी मंज़िल हासिल कर लेता है।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य — अणुव्रत लेखक मंच, (स्वतंत्र लेखक व पत्रकार) जोधपुर, राजस्थान






