
आज का इंसान पद, प्रतिष्ठा और धन के अहंकार में अपने मानवीय मूल्यों को भूलता जा रहा है। विनम्रता, संयम, आत्मविश्वास और निस्वार्थ सेवा ही जीवन को सार्थक और सफल बनाती है।
- विनम्रता से सफलता तक : इंसान के जीवन मूल्य
- घमंड नहीं, मानवता ही इंसान की असली पहचान
- आदर्श जीवन के सूत्र : विनम्रता, संयम और आत्मविश्वास
- मानव जीवन की सार्थकता और व्यवहार की शक्ति
सुनील कुमार माथुर
आज का इंसान पद, प्रतिष्ठा, धन-दौलत पाकर घमंड में इतना इतरा रहा है कि वह अपने आगे दूसरों को कुछ भी नहीं समझता है। वह अपने को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझता है एवं हर किसी की बेइज्जती और अपमान करना अपनी शान समझता है, जो कि अनुचित है और न्यायसंगत नहीं माना जा सकता। किसी महापुरुष ने कहा है कि कलम तभी स्पष्ट, सुंदर और अच्छा लिख पाती है, जब वह थोड़ा झुककर चलती है। उसी प्रकार ज़िंदगी में इंसान का महत्व तभी है, जब व्यक्ति विनम्र, सरल और सहज हो। इसलिए हमें सदैव नम्र रहना चाहिए, सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए और वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम दूसरों से अपने प्रति चाहते हैं।
जीवन की डगर में अनेक बाधाएँ
आदर्श ज़िंदगी जीना कोई आसान कार्य नहीं है। कदम-कदम पर अनेक अवरोध आते हैं, अतः स्वयं को मजबूत बनाइए। डरना नहीं है, हमें अपनी राह खुद बनानी होगी और हर बाधा का हँसते-मुस्कुराते हुए सामना कर आगे बढ़ना होगा। यदि कोई आपकी राह में काँटे बोए तो आप उसकी राह में पुष्प बोएँ, क्योंकि बदले की भावना इंसान की इंसानियत को मार देती है। इसलिए सभी के साथ प्रेमपूर्वक व्यवहार कीजिए। सही समय कभी नहीं आता, बस समय को सही बनाना पड़ता है।
सफलता की सीढ़ियाँ
जीवन में सफलता वही लोग हासिल कर पाते हैं जिनके व्यवहार में नम्रता और विनम्रता का भाव होता है तथा जो शांत प्रवृत्ति के होते हैं। सफलता कोई बाज़ार में मिलने वाली वस्तु नहीं है, अपितु इसे कठिन परिश्रम और कड़ी मेहनत से प्राप्त किया जाता है। साथ ही कार्य के प्रति निष्ठा और ईमानदारी भी नितांत आवश्यक है। जब आप सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहे हों, तो पीछे छूटे लोगों से अच्छा व्यवहार करें, क्योंकि उतरते समय वही लोग फिर रास्ते में मिलेंगे।
आत्मविश्वास
परमात्मा द्वारा दिया गया यह मानव जीवन अनमोल है। यह हमारे पिछले जन्म में किए गए नेक कर्मों का परिणाम है। अतः इस जीवन की सार्थकता तभी है जब हम सभी के साथ समान व्यवहार करें। याद रखिए—सरलता से बढ़कर कोई हल नहीं, मधुरता से बढ़कर कोई पल नहीं, मानवता से बढ़कर कोई गुण नहीं और आत्मविश्वास से बढ़कर कोई बल नहीं है। जीवन में सादगी के साथ-साथ संयम, धैर्य और सहनशीलता का होना भी नितांत आवश्यक है।
चोर
कहते हैं कि बीते हुए कल का अफ़सोस और आने वाले कल की चिंता दो ऐसे चोर हैं जो हमारे आज की खूबसूरती को चुरा लेते हैं। इसलिए जो बीत गया, सो हो गया—उसकी चिंता मत कीजिए। आज को अच्छा बनाइए। जब आप आज को खुशी-खुशी जीते हैं तो आने वाला कल भी अच्छा होता है, क्योंकि आपने जीवन की नींव मजबूत कर ली होती है। जो लोग अतीत और भविष्य की चिंता में जीवन बिताते हैं, वे सदैव दुःखी रहते हैं।
निस्वार्थ भाव से की गई सेवा
जिस प्रकार आकाश से गिरा जल किसी न किसी रास्ते से होकर समुद्र तक पहुँच ही जाता है, उसी प्रकार निस्वार्थ भाव से की गई सेवा और प्रार्थना भी किसी न किसी मार्ग से ईश्वर तक पहुँच ही जाती है। इसलिए जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा करते रहना चाहिए। जब कोई व्यक्ति आपसे अपना दुःख साझा करे, तो उसकी पीड़ा को ध्यानपूर्वक सुनें और सामर्थ्य अनुसार सहायता करें, क्योंकि ईश्वर के बाद उसने आप पर सबसे अधिक विश्वास किया है। उसकी भावना और पीड़ा का मज़ाक न बनाएं।
बुद्धि का दीपक
क्रोध हवा का वह झोंका है जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है। क्रोध की ज्वाला इतनी खतरनाक होती है कि शांत होने पर ही इंसान समझ पाता है कि उसने कितना बड़ा नुकसान कर लिया है। क्रोध एक ही पल में सकारात्मक सोच और मधुर संबंधों को नष्ट कर देता है। अतः क्रोध, घमंड और अहंकार से दूर रहें।
सिर झुकाने से भगवान नहीं मिलते
भगवान की कृपा पाना उतना आसान नहीं जितना हम समझते हैं। ईश्वर को पाने के लिए मन की एकाग्रता, करुणा, दया और निस्वार्थ भक्ति आवश्यक है। केवल औपचारिक पूजा और दिखावे से भगवान प्रसन्न नहीं होते। केवल सिर झुकाने से भगवान नहीं मिलते।
लोगों के चेहरे भी पढ़ें
आदर्श जीवन के लिए केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि लोगों के चेहरों को पढ़ना भी आना चाहिए। किताबें ज्ञान देती हैं, जबकि अनुभव हमें जीवन का वास्तविक बोध कराता है। संवाद ही वह माध्यम है जो हमें अनुभव के सागर से जोड़ता है। बड़े-बुजुर्गों के अनुभव अनमोल होते हैं। इस नश्वर संसार में सबसे समझदार वही है जो अपनी कमियों को पहचानकर समय रहते सुधार लेता है।
— सुनील कुमार माथुर
सदस्य, अणुव्रत लेखक मंच, स्वतंत्र लेखक व पत्रकार, जोधपुर, राजस्थान








