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लोकसभा में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कुछ लोग वंदे मातरम को जिन्ना की नजर से देखते हैं और आज़ादी के बाद इसे जानबूझकर हाशिए पर रखा गया।
- लोकसभा में तीखी बहस: राजनाथ बोले—कांग्रेस वंदे मातरम को हमेशा हाशिए पर रखती रही
- वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर करारा प्रहार
- राष्ट्रगीत पर संसद में राजनीति गर्माई, राजनाथ ने कहा—कुछ लोग जिन्ना की सोच से देखते हैं वंदे मातरम
- राजनाथ का सवाल—अखंड भारत से डरने वालों का समर्थन क्यों करती रही कांग्रेस?
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र में सोमवार को वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर विशेष चर्चा का माहौल उस समय तेज़ राजनीतिक रंग ले गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। लोकसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वंदे मातरम न केवल भारत की स्वतंत्रता का मंत्र था बल्कि करोड़ों देशवासियों की भावना, प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का स्रोत था। फिर भी आज़ादी के बाद इसे उसके योग्य सम्मान नहीं दिया गया।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि 1906 में जब भारत का पहला राष्ट्रीय ध्वज तैयार किया गया, उसके केंद्र में वंदे मातरम अंकित था। इस ध्वज को बंगाल में पहली बार फहराया गया और अगस्त 1906 में जन-जागरण बढ़ाने के लिए ‘वंदे मातरम’ नामक समाचार पत्र भी प्रकाशित हुआ। उस काल में वंदे मातरम केवल एक नारा नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र की ऊर्जा और स्वतंत्रता की चीख थी। रक्षा मंत्री ने कहा कि वंदे मातरम अपने आप में पूर्ण है, लेकिन इसे अपूर्ण सिद्ध करने के प्रयास किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता के बाद राष्ट्रगीत को हाशिए पर धकेला गया और उसे वह न्याय नहीं दिया गया जिसका वह हकदार था। राजनाथ सिंह ने कहा—“कुछ लोग वंदे मातरम को जिन्ना के चश्मे से देखते हैं, यही समस्या की जड़ है।”
कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए उन्होंने कहा कि वंदे मातरम केवल बंगाल या किसी एक हिस्से का गीत नहीं था, बल्कि इसका प्रयोग पूर्व से पश्चिम तक हर कोने में होता था। इतना ही नहीं, भारत से बाहर भी प्रवासी भारतीय स्वतंत्रता की भावना जगाने के लिए इसका जाप करते थे। उन्होंने आगे यह भी सवाल उठाया कि कांग्रेस ने उन लोगों का समर्थन क्यों किया, जिन्हें अखंड भारत की अवधारणा से समस्या थी या जो वंदे मातरम के दूसरे छंदों पर आपत्ति जताते थे। राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रगीत की 150वीं वर्षगांठ पूरे गौरव के साथ मनाई जाएगी और उसे वह सम्मान मिलेगा, जिसकी वह पात्र है।
हालांकि कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी सहित कई नेताओं ने इस बहस को राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित बताया और कहा कि सरकार वंदे मातरम जैसे सांस्कृतिक प्रतीक का उपयोग चुनावी ध्रुवीकरण के लिए कर रही है। विपक्ष ने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि बंगाल चुनावों से पहले इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से हवा दी जा रही है। लोकसभा में यह चर्चा लंबे समय तक चली और कई सदस्यों ने वंदे मातरम के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक महत्व पर अपने विचार रखे। लेकिन राजनाथ सिंह का कांग्रेस पर यह करारा हमला पूरे सत्र की केंद्रबिंदु बन गया, जिसने आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस को और तीव्र करने के संकेत दिए हैं।







