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प्रकृति… अपने निजी स्वार्थ की खातिर इंसान ने धरती माता का जम कर दोहन कर खनिज संपदा, पेट्रोल डीजल, जल, बजरी, कोयला और न जाने कौन कौन से खनिज पदार्थों को निकाल कर धरती को खोखला कर दिया है। नतीजन बाढ व भूकंप के झटके देकर धरती माता प्रकृति से खिलवाड़ करने वाले इंसानों से बदला ले रही हैं। #सुनील कुमार माथुर, जोधपुर, राजस्थान
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प्रकृति ने हमें खूबसूरत नदियां, तालाब, पहाड़, खेत खलिहान, चट्टानें, बाग बगीचे, जलाशय, समुद्र, हरे भरे लहलहाते फलों और फूलों से लदे तरह तरह के पेड पोधें दियें हैं। नाना प्रकार के जीव जन्तु, पशु पक्षी और उनकी मधुर आवाजें दी हैं। प्रकृति ने हमें जो हरे भरे वृक्ष दिये हैं वे इस धरती माता के आभूषण है। लेकिन इस इंसान ने क्या किया परमात्मा द्वारा दी गई बुध्दि, विवेक व शक्ति का गलत इस्तेमाल कर अपने निजी स्वार्थ की खातिर हरे भरे लहलहाते हुए वृक्षों को काट डाला।
जीव जन्तुओं, पशु पक्षियों के घर उजाड़ दिए। उन्हें आराम करने और रहने से वंचित कर दिया। जलाशयों, तालाबों, बांधों की धरती पर अतिक्रमण करके जल संरक्षण का मार्ग बंद कर दिया। हरे भरे वृक्षों को अपने निजी स्वार्थ की खातिर काट कर जीव जन्तुओं, पशु पक्षियों को उनकी भूमि से बेदखल कर दिया। हरे भरे वृक्षों को काट कर धरती माता से उसके आभूषण छीन लिए।
अपने निजी स्वार्थ की खातिर इंसान ने धरती माता का जम कर दोहन कर खनिज संपदा, पेट्रोल डीजल, जल, बजरी, कोयला और न जाने कौन कौन से खनिज पदार्थों को निकाल कर धरती को खोखला कर दिया है। नतीजन बाढ व भूकंप के झटके देकर धरती माता प्रकृति से खिलवाड़ करने वाले इंसानों से बदला ले रही हैं।
धरती हमारी माता हैं और माता कभी भी बदलें की भावना नहीं रखती हैं, लेकिन जब इंसान निष्ठुर, स्वार्थी व बेशर्म हो गया तो आखिर में प्रकृति का इसमें क्या दोष हैं। जो जैसा करेगा वैसा ही भरेगा, यह तो प्रकृति का नियम ही है।
आईये पौधारोपण कर हम इस धरती को फिर से हरा भरा बनाएं । अतिक्रमणों का सफाया कर इसे अतिक्रमण मुक्त बनायें और कूड़ा-करकट कूड़ेदान में फेंक कर स्वच्छ भारत का सपना पूर्ण करें। जहां स्वच्छता हैं वहीं राष्ट्र रोग मुक्त राष्ट्र हैं। प्रकृति का सौन्दर्य बनाये रखने के लिए प्रकृति के नियमों का पालन कीजिए।







