
नवाब मंजूर
वही
जो बात बात में हंसाता था
दुखी मन को भी कर देता था प्रसन्नचित !
मिमिक्री कर लाता था मुस्कान
हंसी ही थी उसकी पहचान!
लेकिन
एक दिन अचानक से आया उसको अटैक
परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराया खटैक
कुछ दिन रहा ठीक ठाक
लोगों को उसके बचने का हो गया विश्वास
कि अब आकर हंसाएगा
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दुखी मन को बहलाएगा
ठहाके पर ठहाके लगवाएगा
सामने वालों को गुदगुदाएगा
लेकिन नहीं रे !
वो तो रूलाकर चला गया
सदा सदा के लिए!
बड़ा बहुरूपिया निकला …
यह राजू श्रीवास्तव!
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¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »मो. मंजूर आलम ‘नवाब मंजूरलेखक एवं कविAddress »सलेमपुर, छपरा (बिहार)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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