
सिद्धार्थ गोरखपुरी

चलो एक सिलसिला शुरू करते हैं
खुद को खुद के रूबरू करते हैं
Government Advertisement...
खुद से ही सवाल हो
और खुद का ही जवाब हो
जवाब बस सही मिले
पर सवाल बेहिसाब हो
खुद को शिष्य बनाकर खुद को गुरू करते हैं
चलो एक सिलसिला शुरू करते हैं
खुद को खुद के रूबरू करते हैं
प्रश्न सारे कठिन होंगे माना मगर
हल न कोई मिले ऐसा मुमकिन नहीं
खुद को जान पाना है वैसे आसां नहीं
ठान ले आदमी तो कुछ भी नामुमकिन नहीं
खुद को जानना ही खुद की आरजू करते हैं
चलो एक सिलसिला शुरू करते हैं
खुद को खुद के रूबरू करते हैं
सिलसिला ये चले तो रुके ही नहीं
ऐसे वाकये इसमें आते और जाते रहें
मैं ही छेड़ दूँ कोई अच्छी सी धुन
मैं और खुद गुनगुनाते रहें
खुद को खुद के जैसा फिर हूबहू करते हैं
चलो एक सिलसिला शुरू करते हैं
खुद को खुद के रूबरू करते हैं
[box type=”info” align=”alignleft” class=”” width=”100%”]
👉 देवभूमि समाचार के साथ सोशल मीडिया से जुड़े…
WhatsApp Group ::::
https://chat.whatsapp.com/La4ouNI66Gr0xicK6lsWWO
FacebookPage ::::
https://www.facebook.com/devbhoomisamacharofficialpage/
Linkedin ::::
https://www.linkedin.com/in/devbhoomisamachar/
Twitter ::::
https://twitter.com/devsamachar
YouTube ::::
https://www.youtube.com/channel/UCBtXbMgqdFOSQHizncrB87A
[/box]







