
डाॅ० धाराबल्लभ पांडेय ‘आलोक’
शब्द मोल अनमोल है, बिन सोचे न बखान।
मन में परखें सोच कर, कहते सभी सुजान।।
वर्णों से मिल पद बने, पद से वाक्य विवेक।
वाक्य करें अभिव्यक्ति मन, बने भाव अतिरेक।।
मीठे शब्द सुधा सदृश, दुखियन दर्द मिटात।
भटके को राहत मिले, मन पीड़ा हर जात।।
शब्द तीर सम भी बनें, कटुता भरे विचार।
भड़के मन का क्रोध सुन, उपजे द्वेष विकार।।
कभी न तीखे बोल से , करें न मिलकर बात।
कटुता बढ़ती मित्रता, प्रेम भाव मिट जात।।
शब्द की महिमा अनत है, ओंकार का रूप।
ध्यान बैठ जप जो करे, देखे ईश स्वरुप।।
आधी व्याधि संकट सभी, मिटे शब्द संयोग।
एकाक्षर ओंकार से, मिट जाएं सब रोग।।
[box type=”info” align=”alignleft” class=”” width=”100%”]
👉 देवभूमि समाचार के साथ सोशल मीडिया से जुड़े…
WhatsApp Group ::::
https://chat.whatsapp.com/La4ouNI66Gr0xicK6lsWWO
FacebookPage ::::
https://www.facebook.com/devbhoomisamacharofficialpage/
Linkedin ::::
https://www.linkedin.com/in/devbhoomisamachar/
Twitter ::::
https://twitter.com/devsamachar
YouTube ::::
https://www.youtube.com/channel/UCBtXbMgqdFOSQHizncrB87A
[/box]







