- चितरंजन चैनपुरा की ‘वन्दे भारतम्’ में राष्ट्रप्रेम की ओजस्वी अभिव्यक्ति
- सत्येन्द्र कुमार पाठक ने सराहा देशभक्ति पर आधारित काव्य संग्रह
- मगही साहित्य में राष्ट्रप्रेम का स्वर बुलंद करती ‘वन्दे भारतम्’
- सैनिकों के त्याग और राष्ट्रीय एकता को समर्पित है ‘वन्दे भारतम्’
जहानाबाद (बिहार)। मगही और हिंदी के सुप्रसिद्ध आशु कवि चितरंजन चैनपुरा की चर्चित पुस्तक ‘वन्दे भारतम्’ को साहित्यकारों के बीच सराहना मिली है। राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा आयोग, बिहार के राज्य उपाध्यक्ष, प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार सत्येन्द्र कुमार पाठक ने पुस्तक का अवलोकन किया। इस अवसर पर दोनों साहित्यप्रेमियों के बीच आत्मीय मुलाकात हुई। कवि चितरंजन चैनपुरा ने अपनी नवीन कृति उन्हें सप्रेम भेंट की।
पुस्तक के आवरण में देशभक्ति की झलक
‘वन्दे भारतम्’ के आवरण पृष्ठ पर अंकित भारत का मानचित्र, तिरंगा और सैनिक का चित्र पुस्तक की राष्ट्रवादी भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करते हैं। आवरण की यह दृश्यात्मक अभिव्यक्ति मातृभूमि के प्रति समर्पण, देश की एकता और सैनिकों के प्रति सम्मान का संदेश देती है। पुस्तक पर चर्चा के दौरान सत्येन्द्र कुमार पाठक ने कहा कि ‘वन्दे भारतम्’ महज एक कविता संग्रह नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति अगाध प्रेम, वीर सैनिकों के सर्वोच्च त्याग और राष्ट्रीय एकता की भावना को अभिव्यक्त करने वाला ओजस्वी दस्तावेज है। उनके अनुसार, ऐसी साहित्यिक कृतियां समाज में देश के प्रति जिम्मेदारी और समर्पण की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
युवाओं में राष्ट्रप्रेम जगाने की उम्मीद
सत्येन्द्र कुमार पाठक ने चितरंजन चैनपुरा की आशुकवित्व प्रतिभा और मगही व हिंदी में उनके साहित्यिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ‘वन्दे भारतम्’ युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। उन्होंने वर्तमान समय में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता से जुड़े साहित्य की आवश्यकता पर भी जोर दिया। मगही भाषा में देशभक्ति की भावनाओं को साहित्य के माध्यम से अभिव्यक्त करना क्षेत्रीय भाषा और भारतीय सांस्कृतिक चेतना, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
ऐसी रचनाएं मातृभूमि के प्रति सम्मान, सैनिकों के बलिदान और राष्ट्रीय एकता के संदेश को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं। चितरंजन चैनपुरा की ‘वन्दे भारतम्’ इसी दृष्टि से साहित्य जगत में उल्लेखनीय कृति के रूप में देखी जा रही है। पुस्तक के माध्यम से राष्ट्रप्रेम की भावना को साहित्यिक अभिव्यक्ति देने का प्रयास मगही और हिंदी साहित्य के पाठकों के लिए भी रुचिकर हो सकता है।
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