
काम की बात : बारबार फोन चेक करने से बचें, प्रोफेसर होरवुड के अनुसार, बारबार फोन चेक करने के कारण लोगों में तनाव बढ़ रहा है। नोटीफिकेशन का जवाब न देने से लोग विचलित हो जाते हैं। नोयडा, उत्तर प्रदेश से स्नेहा सिंह की कलम से…
आज लोगों में सोशल मीडिया का पागलपन इस हद तक बढ़ गया है कि अगर एक मिनट के लिए भी इंटरनेट न हो तो बिलकुल नहीं चलता। परिवार के साथ रहते हुए भी लोगों का ध्यान मोबाइल में अधिक रहता है। ह्वाट्सएप फैमिली ग्रुप का मैसेज हो या फिर जोमैटो का ऑफर, सोशल मीडिया या फोन के अन्य एप्स के नोटीफिकेशन के कारण हर थोड़ी देर में आप का ध्यान विचलित करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फोन साइलेंट मोड पर हो या न हो, लोग अपने काम से विचलित हो जाते हैं। चलिए जानते हैं ऐसा क्यों होता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
हर व्यक्ति हर पंद्रह मिनट पर फोन देखता है
एक अनुमान के अनुसार, लोग पूरे दिन में 85 बार फोन चेक करते हैं। जिसका मतलब यह होता है कि लोग हर पंद्रह मिनट पर फोन चेक करते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि हर पंद्रह मिनट पर लोगों का ध्यान फोन की ओर जाता है यानी काम से ध्यान भटक जाता है। अगर टीवी देख रहे हैं तब तो कोई बात नहीं, पर पढ़ रहे हैं, काम कर रहे हैं या परिवार के साथ समय गुजार रहे हैं, तब ऐसा करना उचित नहीं है।
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दो तरह से ध्यान भटक सकता है
आस्ट्रेलिया की डीकिन यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान के वरिष्ठ लेक्चरर शेरोन होरवुड के अनुसार, बारबार फोन की घंटी बजने से लोगों का ध्यान दो तरह से भटक सकता है। पहला एक्सोजेनस इंटरप्शन और दूसरा एंडोजेनस इंटरप्शन कहा जाता है। जब फोन पर नोटीफिकेशन आता है वह एक्सोजेनस इंटरप्शन है। वह लोगों को उत्साहित करता है।
यह उत्तेजना और आनंद लोगों में जुआ खेलते समय मिलता है। ऐसी ही उत्तेजना फोन में नोटीफिकेशन आने पर आती है। जिससे लोगों में उस चीज की लत लग जाती है। एंडोजेनस इंटरप्शन में अंदर से फोन चेक करने की इच्छा होती है यानी कि नोटीफिकेशन न भी आए तब भी लोगों का ध्यान काम से भटक कर फोन की ओर चला जाता है। यह लोगों बिना मतलब विचलित करता है।
बारबार फोन चेक करने से बढ़ता है तनाव
प्रोफेसर होरवुड के अनुसार, बारबार फोन चेक करने के कारण लोगों में तनाव बढ़ रहा है। नोटीफिकेशन का जवाब न देने से लोग विचलित हो जाते हैं। उनका ध्यान काम में नहीं लगता। उनके पास प्रोडक्टिविटी और ध्यान का अभाव हो जाता है। एक बार काम से ध्यान हटने के बाद दोबारा काम में मन नहीं लगता। इसके बाद मन में अपराधबोध और हताशा पैदा होती है।
बारबार फोन चेक करने से इस तरह बचा जा सकता है
- जिस एप्स का नोटीफिकेशन किसी काम का न हो, उसे बंद कर दें।
- रात को फोन दूसरे कमरे में रखें, जिससे आप की नींद न खराब हो।
- फोन चेक करने की इच्छा हो, तब भी न चेक करें।
- कम से कम 25 मिनट तक काम में ध्यान लगाएं। इसके बाद जब ब्रेक लें तभी फोन चेक करें।
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