
वीरेंद्र बहादुर सिंह
महीने की पहली तारीख। बहू के बनाए नियम के अनुसार, हर महीने की तरह उस दिन भी उनके ‘डेट’ का दिन था। बुढ़ापे में तैयार होने का मतलब पहाड़ पर चढ़ने जैसा।
“मां नवनीत आ गया।” बहू की आवाज सुन कर रेखा बाहर आई।
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सास को देख कर बहू ने कहा, “मम्मी, आज तो आप महारानी लग रही हैं।”
इतना कह कर बहू ने सास का हाथ पकड़ा और कार में बैठा दिया। इसके बाद मां अपने बेटे के साथ डेट पर निकल गई। शादी के बाद पति-पत्नी को एकांत देने के लिए तमाम ‘डेट’ की व्यवस्था की जाती है।
पर मां-बेटे को एकांत देने वाली इस तरह की ‘डेट’ की व्यवस्था करने वाली तो कोई बेटी समान बहू ही कर सकती है।
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¤ प्रकाशन परिचय ¤
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