
सुनील कुमार माथुर
हमें यह मानव जीवन मिला हैं तो फिर हम अपने आपको ईश्वर की भक्ति में लगा दे तभी इस मानव जीवन का सार हैं । दैनिक दिनचर्या के अलावा हम बेकार की गपशप ही तो करते हैं या फिर एक – दूसरे की चुगली , बुराई या आलोचना के अलावा करते ही क्या हैं । ऐसा करने से हमें कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है फिर ऐसी चर्चा करके अपना समय क्यों बर्बाद करें । इससे अच्छा तो यह हैं कि हम कथा सुने , भजन-कीर्तन करें । प्रभु के नाम का स्मरण करें ऐसा करने का अर्थ यह हैं कि हम ईश्वर के नाम का अमृतपान कर रहें है।
कहते हैं कि जो इंसान इंसान के काम न आये वह कैसा इंसान हैं । बस वह तो अपने घमंड में ही मरा जा रहा हैं । इंसानियत को लेकर एक संत महात्मा ने बहुत ही अच्छी बात कहानी के रूप में बताई । महात्मा ने कहा कि भरी गर्मी में एक प्यासा राहगीर जा रहा था । उसे दूर तक कहीं पानी दिखाई नहीं दे रहा था । उधर उसका गला सूखा जा रहा था तभी उसकी निगाह एक दुकान में रखे पानी के घडे पर पडी उसने दुकानदार से बार – बार अनुरोध किया कि मुझे बडी जोर की प्यास लगी हैं एक लोटा पानी पिला दीजिए।
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लेकिन दुकानदार ने हर बार उसे यही कहा कि अभी यहां कोई आदमी नहीं हैं जो तुझे पानी पिला सकें । इस पर वह पायासा आदमी बोला अरे ! थोडी देर के लिए आप ही आदमी बन जायें । इतना सुनते ही दुकानदार को ऐसा झटका लगा कि वह मन ही मन में बोला देखों यह कितनी बडी बात कह गया । यह बात मेरे दिमाग में पहले क्यों नहीं आई।
कहने का तात्पर्य यह है कि जो इंसान किसी के काम न आये वह किस काम का । सच्चा इंसान तो वही हैं जो दूसरों के हाव भाव देखकर ही समझ जाये कि कौन व्यक्ति सुखी हैं और कौन जरूरतमंद हैं । इस अमूल्य मानव जीवन को प्रभु से जोडने में लगाए न कि भोगो को भोगने में।
इस नश्वर संसार में हमें जो भौतिक सुख सुविधाएं मिली हुई हैं वे सभी हमें विपतियो की ओर ले जाने वाली हैं । जीवन का असली सुख तो प्रभु के चरणों में ही हैं । अगर बच्चों में आदर्श संस्कार नहीं है तो उसका जीवन जीना ही बेकार हैं । जीवन में यह आवश्यक नहीं है कि हम कितने बुध्दिमान हैं । हमारे दिमाग में कितना ज्ञान भरा हुआ हैं अपितु महत्वपूर्ण बात यह है कि उस ज्ञान को हमने जीवन में कितना आत्मसात किया हैं। जीवन में ज्ञान बढें । भक्ति बढें । तभी जीवन का सार हैं।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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