
निस्वार्थ सेवा के बदले मिलने वाला प्यार, अपनापन और सम्मान धन से कहीं अधिक मूल्यवान है। लेख में जरूरतमंदों की मदद और लोक कल्याण के कार्यों के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आने का संदेश दिया गया है।
- निस्वार्थ सेवा से मिलता है अनमोल सम्मान
- जनता का प्यार, अपनापन और इज्जत अनमोल
- सेवा भावना से जीवन में आती हैं खुशियां
- निस्वार्थ सेवा का संकल्प लें
सुनील कुमार माथुर
जब आप किसी का निस्वार्थ भाव से कार्य करते हैं तो आपको बदले में उनका प्यार, अपनापन और इज्जत मिलती है। इसलिए हर कार्य को धन पाने की इच्छा से मत जोड़िए। यह ठीक है कि जीवन व्यतीत करने के लिए धन की प्राप्ति आवश्यक है, लेकिन कुछ काम ऐसे भी होते हैं, जहां धन गौण रहता है और सेवा का भाव अधिक रहता है। आज की दुनिया मतलब की दुनिया है, फिर भी हमें दूसरों की निस्वार्थ भाव से सेवा करनी चाहिए।
कहते हैं कि जो दूसरों के जीवन में उजाला करता है, उसके जीवन में कभी भी अंधेरा नहीं होता है। इसलिए हमेशा ऐसा काम कीजिए कि हमारी वजह से किसी दूसरे को तकलीफ न हो। जो लोग लोक कल्याण के कार्य करते हैं, उनके जीवन में हमेशा खुशियां छाई रहती हैं। प्रायः देखा गया है कि लोग कहते हैं कि समाज सेवा करने से क्या मिलता है। ऐसा वे लोग ही सोचते हैं, जो पैसे को सर्वाधिक प्राथमिकता देते हैं।
वे शायद यह भूल जाते हैं कि निस्वार्थ भाव से सेवा करने पर जनता जनार्दन का प्यार, अपनापन और इज्जत मिलती है, जो बड़ी ही कीमती होती है, जिसे हम बाजार से नहीं खरीद सकते। यह तो आपकी निस्वार्थ सेवा भावना से ही कमाई जा सकती है। यही वजह है कि जनता का प्यार, अपनापन और इज्जत अनमोल है, जो भाग्यवान लोगों को ही मिलती है।
अतः आज ही आप भी निस्वार्थ भाव से सेवा करने का संकल्प लीजिए और जरूरत पड़ने पर जरूरतमंदों की मदद कीजिए। आपकी सहायता का एक कदम न जाने किसकी किस्मत को बदल दे और उनके जीवन में खुशियां भर दे।
सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
जोधपुर, राजस्थान






