साहित्य लहर
कविता : आओ शान की जिंदगी जीएं

सुनील कुमार माथुर
जिंदगी चार दिन की चांदनी है
यह प्रभु का दिया हुआ अनमोल रत्न है
ज़िंदगी जीओं तो शान से
जिंदगी तो एक माट्टी का बुलबुला है
न जाने कब टल्ला लग जाये और
यह जिंदगी चलती बने
मेरे देशवासियों ! जिंदगी को
मस्ती के संग जीओ
हंसते – मुस्कुराते जीओं
सबके साथ जीओं
बडों का मान – सम्मान करें
सबके साथ समान व्यवहार करें
जिंदगी तो चार दिन की चांदनी है
अतः
जितना हो सके उतना
समाज उत्थान के लिए कीजिए
न जाने कब किसका आपके
हाथों कल्याण हो जायें
जिंदगी मिली है तो कुछ
समाज हित में कीजियें
अपने लिए तो हर कोई करता है
दूसरों के लिए करें तो
जिंदगी का आनन्द ही कुछ और है
आओ शान की जिंदगी जीये
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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