जीवन के सुनहरे पल

सुनील कुमार माथुर
जीवन में स्वार्थी नहीं सहयोगी बनें । दूसरों का सहयोग करना सीखें । सहयोग करने से ही आपसी मेलजोड प्रगाढ होते हैं और आपसी प्रेम – स्नेह और भी प्रगाढ होते हैं । सेवा करने वालों की ही समाज में वाह – वाह होती है । न कि स्वार्थी लोगों की । स्वार्थी लोग तो केवल झूठी वाह वाही लूटने के लिए इधर – उधर मुंह मारते फिरते है और कई बार वे अपने ध्येय में सफल भी हो जाते हैं ।
इस नश्वर संसार में जन्म – मृत्यु का चक्र तो चलता ही रहता हैं और मृत्यु एक दिन आना निश्चित ही हैं फिर डर काहे का । जीवन के जितने भी दिन है एक – द् दूसरे के साथ प्रेम पूर्वक रहकर निभायें और जीवन को खुशहाल बनायें । रो – रो कर जीवन जीने के बजाय हंसते हुए जीवन बितायें । इसी में महानता है ।
जीवन के इन सुनहरे़ पलों के एक – एक क्षण का आनंद लीजिए और जीवन को स्वर्गमय बनाये । खुद भी खुशी – खुशी जीवन जीये़ और दूसरों को भी खुशी खुशी जीवन जीने दीजिए । शांतिमय जीवन जीना भी एक कला है और जिसने इस कला को सीख लिया उसका जीवन धन्य हो गया।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
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From »सुनील कुमार माथुरस्वतंत्र लेखक व पत्रकारAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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