
सुनील कुमार माथुर
परोपकार की बडी महिमा हैं इसलिए व्यक्ति को हमेशा परोपकार के कार्यों में लगे रहना चाहिए । व्यक्ति को घर – गृहस्थी में रहकर ही धर्म के मार्ग पर चलना चाहिए । भगवान का भजन-कीर्तन करते रहने से सारे ग्रह आपके अनुकूल हो जाते हैं । अतः व्यक्ति को ईश्वर की भक्ति बराबर करते रहना चाहिए । ईश्वर तो एक ही हैं लेकिन उसके नाना रूप और नाम हैं और आप जिस रूप में भी उसकी पूजा आराधना करते हैं वह भाव के साथ होनी चाहिए ।
जीवन में परोपकार की बडी महिमा हैं इसलिए व्यक्ति को हमेशा परोपकार के कार्य में लगा रहना चाहिए । अपनी सामर्थ्य के अनुसार समय पर दान पुण्य करते रहना चाहिए चूंकि यह भी परोपकार का ही भाग हैं । गर्मियों के मौसम में ठंडे पानी की प्याऊ लगायें । छायादार जगहों की व्यवस्था करें ताकि राहगीर कुछ देर वहां बैठकर गर्मी से राहत पा सके। पशु-पक्षियों के लिए दाने पानी व चारे की व्यवस्था करें
बीमार जानवरों का उपचार करावे ।
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किसी जरूरतमंद की मदद करना यह परोपकार ही हैं । दूसरों की निस्वार्थ भाव से सेवा करना भी एक बहुत बडा परोपकार हैं चूंकि अपने लिए व अपने परिवारजनों के लिए तो हर कोई करता हैं लेकिन दूसरों के लिए जो करता हैं वही तो परोपकार हैं । परोपकार के कार्य करने से आपका यह लोक और परलोक दोनों ही सुधर जायेंगे ।
इतना ही नहीं इससे जीवन में नई ऊर्जा व उत्साह का संचार होता हैं । अतः सदैव पुनीत कार्यों में भागीदार बनें । जिस घर में सुबह – शाम बनने वाले भोजन का भगवान के भोग लगाया जाता हैं उस घर परिवार में सदैव सुख – शांति व समृध्दि बनी रहती हैं और घर – परिवार में कभी भी कलह नहीं होती है । परिवार के सभी सदस्यों के बीच में प्रेम व स्नेह बना रहता हैं ।
जहां तक संभव हो सके परिवार के सभी को साथ में बैठकर भोजन करना चाहिए । अगर ऐसा सुबह संभव न हो तो शाम को तो साथ में बैठकर भोजन करना ही चाहिए । ऐसा करने से सभी सदस्यों के बीच आपसी सामंजस्य व सद् भाव बना रहता हैं और विचारों का आदान – प्रदान बिना किसी बाधा के हो जाता हैं।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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