देहरादून में वर्ष 2003 में दर्ज देह व्यापार के एक मामले में आरोपित नवदीप उर्फ विक्की गर्ग को अदालत ने 23 साल बाद दोषमुक्त कर दिया। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल नहीं रहा। मामला दिसंबर 2003 में डालनवाला थाना क्षेत्र के केदारपुरम में पुलिस की छापेमारी के बाद दर्ज किया गया था।
- 2003 के मुकदमे में 23 साल बाद आया फैसला
- अदालत ने नवदीप उर्फ विक्की गर्ग को किया दोषमुक्त
- अभियोजन आरोप साबित करने में रहा असफल
- केदारपुरम छापेमारी से जुड़ा था पुराना मामला
देहरादून। देह व्यापार के आरोप से जुड़े 23 साल पुराने मामले में अदालत ने नवदीप उर्फ विक्की गर्ग को दोषमुक्त कर दिया है। द्वितीय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में हुई सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया गया। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपित के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका।
यह मामला वर्ष 2003 में डालनवाला थाने में दर्ज किया गया था। पुलिस के अनुसार, दिसंबर 2003 में केदारपुरम क्षेत्र स्थित एक घर में देह व्यापार किए जाने की सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस ने मौके पर छापेमारी की और नवदीप उर्फ विक्की गर्ग को गिरफ्तार किया था। इसके बाद पुलिस ने मामले में आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया।
साक्ष्यों के आधार पर नहीं साबित हुए आरोप
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से दस्तावेज और अन्य साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए। हालांकि, अदालत ने साक्ष्यों और बयानों का परीक्षण करने के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को पुष्ट रूप से साबित नहीं कर सका। अदालत के अनुसार, प्रस्तुत बयान से मामले की पूरी कहानी आरोपित के खिलाफ प्रमाणित नहीं होती।
अभियोजन की ओर से ऐसा पर्याप्त साक्ष्य भी सामने नहीं आया, जिसके आधार पर आरोपित के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध माना जा सके। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने नवदीप उर्फ विक्की गर्ग को मामले में दोषमुक्त कर दिया। इस तरह वर्ष 2003 में दर्ज हुए इस मुकदमे का निस्तारण 23 साल बाद हुआ।

