डॉ. सत्यवान सौरभ के दोहे वर्तमान समाज, राजनीति, न्याय व्यवस्था और रिश्तों की बदलती तस्वीर को तीखे...
डॉ. सत्यवान सौरभ
यह लेख विद्यालयों में अनुशासन और बच्चों के सम्मान के बीच संतुलन की आवश्यकता पर प्रकाश डालता...
डिजिटल युग में सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति के नए अवसर दिए हैं, लेकिन लोकप्रियता की अंधी दौड़...
यू.पी.एस.सी. भारत की प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक है, लेकिन इसे सफलता का एकमात्र पैमाना मान लेना...
यह लेख बदलते सामाजिक परिवेश में होली के स्वरूप और उससे जुड़ी मर्यादाओं पर विचार करता है।...
लेख में हरियाणवी संगीत में बढ़ती दोअर्थी भाषा और महिलाओं के अपमानजनक चित्रण पर चिंता व्यक्त की...
विधायकों के टेलीफोन भत्ते में वृद्धि ने पारदर्शिता और जवाबदेही पर नई बहस छेड़ दी है। डिजिटल...
आगरा की साहित्यिक संस्था जय विजय ने वर्ष 2025 के लिए अपने 12वें वार्षिक रचनाकार सम्मान की...
सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन योजना के तहत निर्धारित कम कुकिंग कॉस्ट...
यह कविता एक नन्हे बच्चे के खेल और सपनों की मासूम दुनिया को दर्शाती है। सड़क को...














