
व्यवहार और आदर, हम आज अपने मेकअप पर पानी की तरह धन बेकार में ही बहा रहे हैं चूंकि यह मेकअप चंद घंटो के लिए ही है लेकिन परमपिता परमेश्वर का नाम लेने के लिए हमारे पास… जोधपुर (राजस्थान) से सुनील कुमार माथुरकी कलम से…
हमारे बडे बुजुर्गों का कहना है कि उम्र से सम्मान जरूर मिलता हैं लेकिन आदर तो केवल व्यवहार से ही मिलता है। अतः व्यक्ति को सभी के साथ वहीं व्यवहार करना चाहिए जो वह दूसरों से अपने प्रति व्यवहार चाहता है। तभी तो कहा जाता हैं कि ईश्वर को पाना आसान कार्य नही है। इसके लिए कठोर तप करना पडता हैं। तन और मन शुध्द होने चाहिए और प्रेम रूपी भक्ति होनी चाहिए।
हम प्रभु को धन दौलत से नहीं अपितु प्रेम से ही पा सकते है। देने वाला तो वही हैं, हमारी क्या सामर्थ्य की हम उसे दें। आज का इंसान हाय धन हाय धन करके इतना धन और भौतिक सुख सुविधाएं जुटा ली हैं फिर भी दो नंबर का कार्य कर रहा हैं। उसे मालुम है कि वह मरते समय इसमें से एक भी पैसा अपने साथ नहीं ले जा पायेगा फिर भी बेईमानी करने से बाज नहीं आ रहा है और हजारों लाखों लोगों की हर रोज बददुआएं बटोर रहा हैं।
इतना ही नहीं दान पुण्य भी नहीं करता है। हां जब उस पर या परिजनों पर कोई विपदा आती है तब दान पुण्य करता जरूर है लेकिन उसमे भी श्रध्दा कम व लोक दिखावा अधिक होता हैं। तब फिर किसके लिए यह धन दौलत जमा की जा रही है। यही का यही सब धरा रह जायेगा। याद रखिए प्रभु हर जगह हैं वे हमारे सभी क्रियाकलापों को देख रहे है। तब फिर हम भ्रष्टाचार की गंगा में गोते क्यों लगा रहे है।
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अगर हमारी औलाद लायक होगी तो वह खुद कमा कर खा लेगी व नालायक होगी तो वो है जो भी उडा देगी। हम जो भ्रष्टाचार कर रहे है वह ठीक नही है। हां आप भले ही भ्रष्टाचार कर मन को संतुष्ट कर लो लेकिन यह धन आपका अनर्थ ही करेगा। यह बात याद रखिए। चूंकि आपने दूसरों का हक मार कर यह धन बटोरा है तो उसकी बददुआएं इस धन के साथ हर कदम पर आपके साथ हैं।
हम आज अपने मेकअप पर पानी की तरह धन बेकार में ही बहा रहे हैं चूंकि यह मेकअप चंद घंटो के लिए ही है लेकिन परमपिता परमेश्वर का नाम लेने के लिए हमारे पास वक्त नहीं है। हम परमपिता परमेश्वर के नाम का स्मरण करके अपने व्यवहार और व्यक्तित्व को सुंदर बना सकते है और बिना खर्च किये यह सुंदरता पा सकते हैं। प्रभु बाहरी सुंदरता को नही देखते है अपितु भक्त के मन की शुध्दता व पवित्रता के भाव को देखते हैं। इसलिए परोपकारी बने, दयावान व करूणावान बने न कि निर्दय, पापी, निष्ठुर बनना है।
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