
भुवन बिष्ट
रानीखेत। पहाडो़ में मौसम ने करवट ली है और ठंड ने भी दस्तक देना शूरू कर दिया है। आज आसमान में बादल छाये हुए हैं तो बारिश की बूंदों ने ग्रामीण अंचलों में होने वाले खेती बाड़ी के कार्य में बाधा डाल दी है। अचानक मौसम के बदलाव व बारिश की बूंदों ने खेती बाड़ी के कार्य में लगे लोगों को चिंतित कर दिया।
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आजकल ग्रामीण अंचलों में असोज में होने वाला कार्य भी प्रगति पर है। धान मढ़ाई व दलहनी फसलों में रैस गहत भट आदि को सूखाने, चूटने, व संग्रहीत करने का कार्य प्रगति पर है। गाँवों में असोज के कार्य में बीच बीच में बारिश होने से बहुत बड़ी समस्या का सामना किसानों को करना पड़ता है क्योंकि ग्रामीण अंचलों में गाँवों में सभी के पास भंडारण की व्यवस्था होना संभव नहीं है।
खेती बाड़ी से संबधित असोज के कार्य में घास कटान का कार्य भी पशुपालन के लिए बहुत बड़ी भूमिका निभाता है क्योंकि इस समय काटी गयी घास को किसान वर्षभर पशुपालन चारा के लिए भंडारण करके रखते हैं। ग्रामीण अंचलों में लूठे के रूप में इसका संग्रहण भंडारण किया जाता है।
दलहनी फसलें भी तैयार हैं इन्हें सूखने संग्रहीत करने के लिए धूप की नितांत आवश्यकता होती है। बारिश में ये सड़कर खराब हो जाती हैं जिससे वर्षभर की मेहनत बेकार हो जाती है। लेकिन अचानक हो रही बारिश से किसानों को इससे नुकसान हो रहा है क्योंकि कटी हुई घास, मडूवा, दलहनी फसलें बारिश से सड़ कर खराब हो जाती हैं।





