शगुन के रूप में 101 रूपये स्वीकार किये

सुनील कुमार माथुर
अगर इंसान में कुछ नया कर गुजरने की तमन्ना हो तो वह बहुत कुछ कर सकता हैं और इस नेक कार्य के लिए उसे शुरुआत अपने से या अपने घर – परिवार से ही करनी होती हैं अगर कोई नया करने की ठान ले तो कोई ताकत नहीं है कि वह उसे अपने नेक कर्म को करने से रोक सकें।
हम समाज व राष्ट्र की जनता को बदल नहीं सकते लेकिन हम स्वंय बदल जायें तो समाज व राष्ट्र स्वतः ही बदल जायेगा । बस आपकी सोच , कार्य ऐसा हो जिसे देखकर और सुनकर हर कोई अपने को बदलने के लिए आगें आयें । बस किसी को तो मार्गदर्शक बनना ही होगा और कुछ कर दिखाना होगा।
राजस्थान के पाली जिले की मारवाड़ जंक्शन तहसील के गांव वाडिया मारवाड़ निवासी सुरेन्द्र सिंह चम्पावत ने पुत्र मानवेन्द्र सिंह की शादी में तिलक दस्तूर में सिर्फ 101 रूपये स्वीकार कर समाज के युवाओं के समक्ष एक आदर्श मिसाल कायम की।
मानवेन्द्र सिंह की शादी राजसमन्द जिले के पानडी गांव निवासी इन्द्रसिंह चुडावत की पुत्री नीलम के साथ 14 नवम्बर को राजसमन्द में हुई । इसमें दुल्हन के पिता ने तिलक दस्तूरी के रूप में दूल्हे को 5 लाख 5 हजार 101 रूपये दियें लेकिन दूल्हे ने लेने से इंकार कर दिया और शगुन के रूप में 101 रूपये स्वीकार कर शेष राशि दुल्हन के पिता को लौटा दी और समाज के समक्ष एक आदर्श मिसाल कायम की । इस मिसाल की सर्वत्र सराहना की जा रही हैं ।
समाज में बढती दहेज प्रथा व दस्तूर के नाम पर नाना प्रकार से कुछ न कुछ चाह रखने वाले लोगों को ऐसे युवाओं के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए और अपने जीवन में आत्मसात करना चाहिए तभी समाज व राष्ट्र का भला हो सकता हैं और तिलक दस्तूर के नाम से वसूली जाने वाली समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ।
सुनील कुमार माथुर
33 वर्धमान नगर शोभावतो की ढाणी खेमे का कुआ पालरोड जोधपुर राजस्थान
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() |
From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
---|
True
True
Very nice
Vary nice
Nice
Bahut badhiya