
नगर निगम चुनाव में भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल करने वाली मेयर आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी की भाजपा में वापसी से श्रीनगर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। दोनों के साथ पार्षदों के भाजपा में शामिल होने से नगर निगम में पार्टी की स्थिति मजबूत हुई है, वहीं पुराने कार्यकर्ताओं और नए नेताओं के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। इस वापसी को 2027 के विधानसभा चुनाव की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी माना जा रहा है।
- भाजपा में लौटीं श्रीनगर मेयर आरती भंडारी, 2027 के चुनाव को लेकर बढ़ी सियासी चर्चा
- बगावत से भाजपा में वापसी तक आरती भंडारी का सफर, श्रीनगर में नए समीकरणों की आहट
- आरती और लखपत भंडारी की भाजपा में एंट्री से गरमाई श्रीनगर की राजनीति, समर्थकों में बहस
- मेयर आरती भंडारी की वापसी से भाजपा मजबूत, पुराने और नए नेताओं के बीच बढ़ी चर्चा
श्रीनगर गढ़वाल। नगर निगम चुनाव के दौरान भाजपा से बगावत कर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरने और जीत हासिल करने वाली श्रीनगर की मेयर आरती भंडारी की करीब डेढ़ साल बाद भाजपा में वापसी ने स्थानीय राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। मेयर आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी के भाजपा में शामिल होने के बाद श्रीनगर के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। आरती भंडारी और लखपत भंडारी की भाजपा में वापसी को महज पार्टी में शामिल होने की घटना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।
स्थानीय राजनीतिक हलकों में इसे आने वाले समय में बनने वाले नए सियासी समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। सोशल मीडिया से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक इस घटनाक्रम को लेकर पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। खास बात यह है कि नगर निगम चुनाव से पहले आरती भंडारी और उनके पति लखपत भंडारी भाजपा से जुड़े हुए थे। मेयर पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद आरती भंडारी पार्टी के टिकट की दावेदार थीं, लेकिन टिकट नहीं मिलने के बाद दोनों ने पार्टी से अलग राह अपनाई। आरती भंडारी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतरीं और चुनाव जीतकर श्रीनगर की मेयर बनीं।
भाजपा से बगावत के बाद निर्दलीय चुनाव जीता
नगर निगम चुनाव के दौरान आरती भंडारी के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने से भाजपा के सामने चुनौती खड़ी हुई थी। आरती भंडारी ने चुनाव में जीत दर्ज कर मेयर पद हासिल किया। दूसरी ओर, पार्टी से अलग होकर चुनावी गतिविधियों में शामिल होने के कारण लखपत भंडारी के खिलाफ भाजपा ने छह वर्ष के निष्कासन की कार्रवाई की थी। उस समय भाजपा और भंडारी परिवार के बीच राजनीतिक दूरी साफ दिखाई दे रही थी। लेकिन अब परिस्थितियां बदल चुकी हैं।
आरती भंडारी और लखपत भंडारी के दोबारा भाजपा में शामिल होने से पहले के राजनीतिक घटनाक्रम की चर्चा भी फिर शुरू हो गई है। बुधवार को दोनों के भाजपा में शामिल होने के साथ ही कुछ पार्षदों ने भी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इससे श्रीनगर नगर निगम में भाजपा की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है।
नगर निगम से लेकर विधानसभा चुनाव तक चर्चा
आरती भंडारी की भाजपा में वापसी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि इसका प्रभाव केवल नगर निगम की राजनीति तक सीमित रहेगा या आने वाले विधानसभा चुनाव में भी इसका असर देखने को मिलेगा। वर्ष 2027 में उत्तराखंड विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव में अभी समय है, इसलिए मौजूदा घटनाक्रम के आधार पर किसी राजनीतिक निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। इसके बावजूद श्रीनगर में भाजपा के भीतर आरती भंडारी की वापसी को लेकर नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। स्थानीय स्तर पर यह भी देखा जा रहा है कि नगर निगम चुनाव के दौरान अलग-अलग खेमों में रहे नेता अब एक ही राजनीतिक मंच पर नजर आएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में पुराने कार्यकर्ताओं, टिकट के दावेदारों और नई राजनीतिक एंट्री लेने वाले नेताओं के बीच तालमेल किस तरह बनता है, यह महत्वपूर्ण होगा।
भाजपा के भीतर भी बढ़ी राजनीतिक चर्चा
आरती भंडारी की वापसी का एक पहलू भाजपा की अंदरूनी राजनीति से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है। नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी के साथ मजबूती से खड़े रहे कार्यकर्ताओं और उस समय पार्टी से अलग राह अपनाने वाले नेताओं के बीच अब नए सिरे से राजनीतिक तालमेल बनाना होगा। पार्टी स्तर पर इस घटनाक्रम को संगठन के विस्तार और मजबूती के रूप में देखा जा रहा है। वहीं, स्थानीय राजनीतिक जानकारों और कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा भी है कि आने वाले समय में आरती भंडारी और लखपत भंडारी को संगठन में किस तरह की राजनीतिक भूमिका मिलती है। यही भूमिका भविष्य में इस वापसी के वास्तविक राजनीतिक प्रभाव को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
सोशल मीडिया पर भी शुरू हुआ बहस का दौर
भाजपा में वापसी के बाद सोशल मीडिया पर भी आरती भंडारी और लखपत भंडारी को लेकर प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। समर्थक इसे भाजपा की मजबूती और राजनीतिक विस्तार के रूप में देख रहे हैं, जबकि विरोधी खेमे की ओर से नगर निगम चुनाव के दौरान हुए घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर भी लोगों के बीच इस घटनाक्रम को लेकर चर्चा है। अब तक जो राजनीतिक बहस नगर निगम चुनाव तक सीमित थी, वह धीरे-धीरे 2027 के विधानसभा चुनाव और क्षेत्र के व्यापक राजनीतिक समीकरणों तक पहुंचती दिखाई दे रही है।
बगावत से वापसी तक का राजनीतिक सफर
आरती भंडारी और लखपत भंडारी का भाजपा से जुड़ना, टिकट को लेकर असहमति के बाद अलग राह अपनाना, नगर निगम चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरना और अब दोबारा भाजपा में शामिल होना श्रीनगर की स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। आरती भंडारी के मेयर बनने के बाद अब भाजपा में उनकी वापसी से राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर बदल गई हैं। पार्टी में उनकी वापसी के साथ नगर निगम में भाजपा का प्रभाव बढ़ा है, वहीं संगठन के भीतर भी नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है।
हालांकि इन बदलावों का वास्तविक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा। फिलहाल सबसे अधिक नजर इस बात पर है कि भाजपा संगठन में आरती भंडारी और लखपत भंडारी की भूमिका क्या रहती है और स्थानीय स्तर पर पुराने तथा नए नेताओं के बीच राजनीतिक तालमेल किस तरह विकसित होता है।






