
सुनील कुमार माथुर
गीतकार , लोक गायक और राजस्थान की आन , बान , कालूराम प्रजापति के गीतों ने सर्वत्र अपनी धूम मचा रखी है यही वजह है कि वे गीत और गायकी के बेताज बादशाह हैं । मां सरस्वती की उन पर असीम कृपा हैं । उनके लिखे गीत लोगों के कंठों में बस गये हैं । उनके मौलिक गीत आज लोक गीत का रूप ले चुके है ।
उनकी गायकी ऐसी हैं कि ऐसा गला भगवान ने शायद किसी को दिया ही नहीं । प्रजापति ने अपने गीतों से न केवल अपने देशवासियों को ही अपितु विदेशी लोगों को भी दिवाना बना दिया है । उन्होंने यह गायकी कहीं भी नहीं सीखीं बस इन पर यह कुदरत की मेहरबानी है।
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मारवाड रत्न और नाहर सम्मान जैसे अनेक सम्मान एवं पुरस्कारों से पुरस्कृत हो चुके हैं । इनकी पुस्तकें कुंवारों टाबरियों , बोल तम्बूरा भाई, रणघोष व कमल की पंखुडियां प्रकाशित हो चुकी हैं । प्रजापति ने जै जै राजस्थान फैसबुक पेज के पटल पर साप्ताहिक ( शनिवार) लोकरंग कार्यक्रम में अपने गीतों की प्रस्तुति देकर इस कार्यक्रम को यादगार बना दिया ।
कालूराम प्रजापति अलबेला व्यक्तित्व हैं। देश – विदेश में जहां भी कहीं कंवारो टाबरियों की धुन सुनाई पडती हैं तो लोग झूमने लगते है। वे कोई परिचय के मोहताज नहीं है। दूरदर्शन व रेडियों पर इनका प्रसिद्ध गीत कुंवारों टाबरियों खूब बज चुका हैं । गीत , संगीत व गायकी गाने वाले के दिल से निकलती हैं । उस वक्त मन मयूर सा नाच उठता हैं व आवाज पंख लगाकर दूर तक उडती है और सभी संगीत प्रेमियों को अपने में समेट लेती हैं ।
गायक कलाकारों का अलग ही अंदाज होता हैं जो गाने वाले और सुनने वालें को अपार आनंद की अनुभूति कराता हैं और जब सुनने वाले झुमने लगते है तब मन को अपार खुशी होती है और उस खुशी को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता । इस आनंद की अनुभूति से मन बाग – बाग हो जाता हैं ।
गायकी , गीत व संगीत ये सब तो ईश्वर की देन हैं और ये माटी के पुतले है । बस उस परमसता के आदेशों व निर्देशों की इस धरती पर पालना कर अपना मानवीय धर्म निभा रहें है । प्रजापति का कहना हैं कि एक कलाकार के लिए तो कला एक पूजा हैं । वंदना हैं । मां सरस्वती का आशीर्वाद हैं जब यह मानव जीवन मिला हैं तो मान – सम्मान , यश , पद – प्रतिष्ठा व सोहरत ये सभी स्वतः मिल जाते हैं जब आप पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ सुचारू रूप से अपनी साधना करते हैं ।
उन्होंने कहा कि साधना में कभी भी कोई समझौता नहीं होता हैं यह तो हुनर है जो दिनों दिन स्वतः ही अभ्यास से निखरता रहता हैं । जहां सच्ची साधना होती हैं वहां ईश्वर हर वक्त आपके साथ खडा रहता हैं । बस आप तो अपना नेक कर्म करते रहिए , फल स्वतः ही मिल जायेंगा । उनका कहना हैं कि अपने हुनर की तुलना कभी भी किसी से न करें । बस हर वक्त कुछ नया व अलग करने का ही प्रयास करें और फिर देखिये कि आपके प्रयास आपको किस मुकाम और ऊंचाइयों तक पहुचाते हैं ।
गीत और गायकी के बेताज बादशाह कालूराम प्रजापति सादा जीवन और उच्च विचारों के धनी हैं । अनेक मान – सम्मान मिलने के बावजूद उनमें तनिक भी घमंड और अंहकार नहीं है । हर किसी के साथ वे सादगी से ही पेश आते हैं और सभी के साथ समान व्यवहार करते हैं ।
¤ प्रकाशन परिचय ¤
![]() | From »सुनील कुमार माथुरलेखक एवं कविAddress »33, वर्धमान नगर, शोभावतो की ढाणी, खेमे का कुआ, पालरोड, जोधपुर (राजस्थान)Publisher »देवभूमि समाचार, देहरादून (उत्तराखण्ड) |
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