- पिथौरागढ़ के विद्यार्थियों को जापानी भाषा, संस्कृति और तकनीक से जोड़ने की पहल
- प्लैनेटस्कूल नर शौर्य कॉन्क्लेव में दिखी भारतीय-जापानी संस्कृति की झलक
- रामलीला, सूमो कुश्ती और एआई नवाचार बने भारत-जापान आयोजन के आकर्षण
- सीमांत युवाओं के लिए जापान में रोजगार के अवसर तलाशने पर जोर
पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ स्थित विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पृथ्वीकुल जापानी स्कूल के सहयोग से आयोजित एक सप्ताह का विशेष सांस्कृतिक, शैक्षणिक एवं कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम संपन्न हो गया। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय युवाओं और विद्यार्थियों को जापानी भाषा, संस्कृति, वेशभूषा, रहन-सहन तथा खेलकूद से परिचित कराना और भारत-जापान के बीच सांस्कृतिक समझ को मजबूत करना रहा। इसके माध्यम से सीमांत क्षेत्र के युवाओं के लिए जापान में रोजगार और कौशल विकास की संभावनाओं से परिचित होने का अवसर भी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
प्लैनेटस्कूल नर शौर्य कॉन्क्लेव में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
कार्यक्रम के समापन दिवस पर विद्यालय परिसर में प्लैनेटस्कूल नर शौर्य कॉन्क्लेव आयोजित किया गया। साहस, अनुशासन, चरित्र और नारी शक्ति की भावना को केंद्र में रखकर आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय और जापानी सांस्कृतिक परंपराओं की झलक देखने को मिली। कार्यक्रम में जापान की प्रसिद्ध सूमो कुश्ती, भारत की पारंपरिक युद्धकला और रामलीला का मंचन किया गया। इसके अतिरिक्त बोधिधर्म और दारुमा से संबंधित नाट्य प्रस्तुति तथा बौद्ध धर्म के महत्व पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। विद्यार्थियों ने जिम्नास्टिक और शतरंज में भी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को विभिन्न देशों की परंपराओं, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का अवसर मिला।
एआई और तकनीक के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहन
आयोजन के दौरान शताभिषा एआई परियोजनाओं और विद्यार्थियों की नवाचार गतिविधियों का प्रदर्शन भी किया गया। भाषा अध्ययन, तकनीकी शिक्षा और साझा अनुसंधान के माध्यम से पिथौरागढ़ को भारत-जापान शैक्षणिक सहयोग के संभावित केंद्र के रूप में विकसित करने की सोच प्रस्तुत की गई। आयोजकों की ओर से इस पहल को अन्य जरूरतमंद विद्यालयों तक पहुंचाने की संभावना भी व्यक्त की गई। इसके तहत विद्या भारती से जुड़े विद्यालयों में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, भाषा अध्ययन और कौशल विकास जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया। ऐसी पहल सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों को नई तकनीकों और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक अवसरों से परिचित कराने में सहायक हो सकती है।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि रहे मौजूद
कार्यक्रम में सीमांत इंजीनियरिंग कॉलेज, पिथौरागढ़ के निदेशक अजीत सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। नगर निगम पिथौरागढ़ की मेयर कल्पना देवलाल ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। अतिथियों ने भारत और जापान के बीच शैक्षणिक तथा सांस्कृतिक सहयोग को युवाओं के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में प्रस्तुत सांस्कृतिक गतिविधियों और कौशल विकास संबंधी प्रयासों को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जोड़कर देखा गया। वक्ताओं ने इस प्रकार के आयोजनों को सीमांत क्षेत्र के युवाओं को व्यापक अवसरों से परिचित कराने और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद बढ़ाने का माध्यम बताया।
गणमान्य नागरिकों, शिक्षकों और पूर्व सैनिकों की उपस्थिति
आयोजन में पूर्व एनएसडी कमांडो ललित भाटिया, विद्यालय के प्रधानाचार्य धीरेंद्र कुमार रावत, के.एस. भाटिया, त्रिलोक सिंह, संभाग निरीक्षक राजेंद्र चंद, पूर्व राष्ट्रीय मुक्केबाज मान सिंह खोलिया, ध्रुव सिंह रावत और सचिन हुंडई के संचालक अथवा प्रबंधक सौरभ भसीन मौजूद रहे। इसके साथ ही उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रदीप सेक्रियाल, मनरेगा लोकपाल जगदीश कॉलोनी और कमल खर्कवाल सहित क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, शिक्षक, पूर्व सैनिक और अभिभावक भी कार्यक्रम में शामिल हुए। आयोजन ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय समुदाय को एक मंच पर लाकर सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा कौशल विकास के महत्व को रेखांकित किया।
सीमांत युवाओं के लिए नए अवसरों की उम्मीद
पिथौरागढ़ जैसे सीमांत जिले में भारत-जापान सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग की पहल स्थानीय युवाओं को नई भाषाओं, तकनीकी कौशल और अंतरराष्ट्रीय कार्य-संस्कृति से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा सकती है। हालांकि, जापान में रोजगार के अवसरों को वास्तविक रूप देने के लिए भाषा प्रशिक्षण, मान्य कौशल प्रमाणन, संबंधित नियमों की जानकारी और रोजगार संस्थानों से समन्वय भी आवश्यक होगा। कार्यक्रम के माध्यम से भारतीय परंपराओं और जापानी संस्कृति को एक साथ प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों में अनुशासन, नवाचार, सांस्कृतिक समझ और भविष्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया। आयोजकों की इस पहल का व्यापक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रशिक्षण के बाद विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई, कौशल विकास और रोजगार संबंधी मार्गदर्शन किस प्रकार उपलब्ध कराया जाता है।
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