उत्तराखंड में बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर कम करने के लिए ढकरानी, खटीमा, पथरी और तिलोथ में चार मेगा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने कुल 76 मेगावाट यानी 190 मेगावाट-ऑवर क्षमता वाली परियोजनाओं के टैरिफ और खरीद समझौते के मसौदे को सशर्त मंजूरी दी है। इन बैटरियों में कम मांग के समय बिजली संग्रहित कर शाम के पीक आवर्स में ग्रिड को आपूर्ति की जाएगी, जिससे महंगी बिजली खरीद पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
- ढकरानी, खटीमा, पथरी और तिलोथ में लगेंगे बैटरी बैंक
- पीक आवर्स में बिजली उपलब्ध कराने की तैयारी
- 190 मेगावाट-ऑवर होगी चार परियोजनाओं की क्षमता
- केंद्र से मिलेगी 18 लाख रुपये प्रति मेगावाट-ऑवर सहायता
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली की बढ़ती मांग और उपलब्धता के बीच अंतर को कम करने के लिए ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य में चार मेगा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) स्थापित किए जाएंगे। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने कुल 76 मेगावाट क्षमता यानी 190 मेगावाट-ऑवर वाले इन चार प्रोजेक्ट्स के लिए निर्धारित टैरिफ और पावर खरीद समझौते के मसौदे को सशर्त मंजूरी दे दी है। ये बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट ढकरानी (देहरादून), खटीमा (ऊधमसिंह नगर), पथरी (हरिद्वार) और तिलोथ (उत्तरकाशी) में स्थापित किए जाएंगे। टेंडर प्रक्रिया के तहत तीन परियोजनाओं की जिम्मेदारी पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड को और एक परियोजना आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड को दी गई है।
चारों परियोजनाओं की जिम्मेदारी तय
यूजेवीएनएल की ओर से आयोजित खुली ई-निविदा में पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी ने चारों परियोजनाओं के लिए सबसे कम दरें कोट की थीं। हालांकि टेंडर की शर्तों के अनुसार एक कंपनी को अधिकतम दो परियोजनाएं ही दी जा सकती थीं। इस व्यवस्था के चलते पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी ने तिलोथ परियोजना को छोड़ दिया। इसके बाद दूसरे स्थान पर रही आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड ने पतंजलि की न्यूनतम बोली पर तिलोथ परियोजना को संचालित करने की सहमति दी। परियोजनाओं का क्षमता के अनुसार बंटवारा इस प्रकार है—
- ढकरानी – 30 मेगावाट: पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी
- खटीमा – 15 मेगावाट: पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी
- पथरी – 16 मेगावाट: पतंजलि रिन्यूएबल एनर्जी
- तिलोथ – 15 मेगावाट: आर्मी इन्फोटेक लिमिटेड
आयोग की ओर से यह आदेश अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने जारी किया। आयोग के अनुसार उत्तराखंड में तय बीईएसएस दरें दिल्ली और पंजाब में हाल में मंजूर दरों की तुलना में कम हैं। ढकरानी परियोजना के लिए 2,69,832 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह, पथरी के लिए 2,79,501 रुपये, खटीमा के लिए 2,79,782 रुपये और तिलोथ के लिए 2,80,000 रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह की दर निर्धारित की गई है।
आयोग ने तुलना में बताया कि दिल्ली में हाल ही में 12.5 मेगावाट की परियोजना के लिए करीब 2.99 लाख रुपये और पंजाब में विभिन्न परियोजनाओं के लिए 3.35 लाख से 3.44 लाख रुपये प्रति मेगावाट प्रति माह की दरें मंजूर की गई थीं।
केंद्र से मिलेगी वित्तीय सहायता
इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार की वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) योजना के तहत भी सहायता उपलब्ध होगी। पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड के अंतर्गत राज्य को 500 मेगावाट-ऑवर क्षमता आवंटित की गई थी, जिसमें से 250 मेगावाट-ऑवर का क्रियान्वयन यूजेवीएनएल के माध्यम से किया जा रहा है। योजना के तहत केंद्र सरकार 18 लाख रुपये प्रति मेगावाट-ऑवर की वित्तीय सहायता तीन किस्तों में उपलब्ध कराएगी।
पीक आवर्स में काम आएगी बैटरी
इन बैटरी स्टोरेज सिस्टम का इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली की मांग कम रहने के दौरान ऊर्जा संग्रहित करने और मांग बढ़ने पर उसकी आपूर्ति करने के लिए किया जाएगा। सामान्य समय में, जब सौर और जलविद्युत से अपेक्षाकृत सस्ती बिजली उपलब्ध होगी, तब यूपीसीएल की ओर से बैटरियों को चार्ज किया जाएगा।
शाम 6 से 9 बजे के पीक आवर्स के दौरान जब बिजली की मांग अधिक रहती है, इन बैटरियों से ग्रिड को बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। इससे राज्य को उस समय राष्ट्रीय बिजली एक्सचेंज से महंगी बिजली खरीदने की आवश्यकता कम हो सकती है। साथ ही, ऊर्जा भंडारण क्षमता बढ़ने से बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने और ग्रिड पर अचानक बढ़ने वाले दबाव को संभालने में भी मदद मिलेगी।

