खराब मौसम के कारण उत्तरकाशी में 10 ट्रेकिंग दलों के 136 पर्वतारोही अलग-अलग स्थानों पर फंस गए हैं, जबकि बागेश्वर में तीन दलों के 43 पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थानों पर रोका गया है। प्रशासन ने सभी दलों की सुरक्षित वापसी के लिए रेस्क्यू प्लान तैयार किया है और सोमवार सुबह छह बजे से आठ हेलीकॉप्टरों के जरिए अभियान शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। सभी पर्वतारोहियों से सैटेलाइट फोन के माध्यम से संपर्क बनाए रखा जा रहा है और रेस्क्यू के बाद उनकी मेडिकल स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था की गई है।
- खराब मौसम में फंसे 179 पर्वतारोही
- उत्तरकाशी-बागेश्वर में रेस्क्यू की तैयारी तेज
- 136 पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी का अभियान
- हेलीकॉप्टरों से पर्वतारोहियों को निकालने की तैयारी
देहरादून/उत्तरकाशी। उत्तराखंड में लगातार खराब मौसम के बीच ऊंचाई वाले पर्वतीय क्षेत्रों में अभियान पर निकले पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उत्तरकाशी जिले में अलग-अलग स्थानों पर 136 पर्वतारोही फंसे हुए हैं, जबकि बागेश्वर जिले में 43 पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थान पर रोक दिया गया है। प्रशासन ने सभी पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित जिलों में रेस्क्यू प्लान तैयार किया है। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने रविवार देर शाम राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा की।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान को प्राथमिकता के आधार पर संचालित किया जाए। बैठक में सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि उत्तरकाशी जिले में 10 ट्रेकिंग दलों के 136 पर्वतारोही विभिन्न स्थानों पर फंसे हैं। वहीं बागेश्वर जिले में तीन दलों के 43 पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थान पर रोका गया है। प्रशासन ने दोनों जिलों में फंसे पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी के लिए अलग-अलग रेस्क्यू योजनाएं तैयार की हैं।
इन पर्वतीय क्षेत्रों में फंसे हैं पर्वतारोही
उत्तरकाशी के जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी शार्दुल गुसाईं के अनुसार, करीब 136 पर्वतारोही अलग-अलग दलों में सितंबर महीने में पर्वतारोहण के लिए रवाना हुए थे। इनमें कालिंदी ट्रैक पास, उडन कॉल पास, माउंट सुदर्शन, भागीरथी-2, जोगिन-1, शिवलिंगा-1 और 2, सतोपंथ तथा श्रीकंठ चोटियों की ओर गए पर्वतारोही शामिल हैं। खराब मौसम के कारण ये अलग-अलग स्थानों पर फंस गए। हालांकि प्रशासन के अनुसार सभी पर्वतारोही फिलहाल सुरक्षित हैं। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि पर्वतारोहियों से सैटेलाइट के माध्यम से लगातार संपर्क बनाए रखा जा रहा है। इससे उनकी स्थिति की जानकारी लेने और आवश्यकता के अनुसार राहत एवं बचाव अभियान को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है।
आठ हेलीकॉप्टरों से शुरू होगा रेस्क्यू
मुख्य सचिव ने सोमवार सुबह छह बजे से आठ हेलीकॉप्टरों के माध्यम से रेस्क्यू अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यूकाडा के माध्यम से पर्याप्त संख्या में हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि मौसम की स्थिति अनुकूल होते ही बचाव अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को मौसम विभाग के साथ लगातार समन्वय बनाए रखने और मौसम की परिस्थितियों के अनुसार रेस्क्यू की कार्ययोजना में आवश्यक बदलाव करने के निर्देश भी दिए हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए सैटेलाइट फोन की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
रेस्क्यू के बाद मेडिकल स्क्रीनिंग
प्रशासन ने केवल पर्वतारोहियों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के बजाय रेस्क्यू के बाद उनकी स्वास्थ्य जांच की भी तैयारी की है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि बचाव अभियान के बाद सभी पर्वतारोहियों की तत्काल मेडिकल स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच कराई जाए। उन्होंने एम्स ऋषिकेश और श्रीनगर मेडिकल कॉलेज को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं, ताकि रेस्क्यू के दौरान या उसके बाद किसी पर्वतारोही की तबीयत खराब होने पर उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता उत्तरकाशी और बागेश्वर में फंसे सभी पर्वतारोहियों को सुरक्षित निकालना है। मौसम की स्थिति को देखते हुए हेलीकॉप्टर रेस्क्यू अभियान की सफलता के लिए मौसम विभाग के इनपुट और पर्वतीय क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था को लगातार निगरानी में रखा जा रहा है।

