पिथौरागढ़ की साहसिक खेल संस्था आईस के प्रशिक्षक मुकेश और लोकेश ने लद्दाख की 6,440 मीटर ऊंची माउंट कांग यातसे-I, 6,300 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो वेस्ट और 6,250 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो ईस्ट को सफलतापूर्वक फतह किया। दोनों ने कठिन मौसम, कम ऑक्सीजन और तकनीकी चढ़ाई जैसी चुनौतियों के बीच यह अभियान पूरा किया। वहीं, स्वर्गीय पर्वतारोही पुरमल सिंह धर्मशत्तू की स्मृति में संस्था के प्रशिक्षक पवन और शुभम् 364 किलोमीटर की साइकिल यात्रा पर निकलेंगे।
- लद्दाख की तीन चोटियों पर पिथौरागढ़ के पर्वतारोहियों का कमाल
- मुकेश और लोकेश ने हासिल की तीन ऊंची चोटियों की चढ़ाई
- 6,440 मीटर तक पहुंचा पिथौरागढ़ के प्रशिक्षकों का हौसला
- पर्वतारोहण के बाद अब 364 किमी साइकिल यात्रा की तैयारी
पिथौरागढ़, 24 सितंबर। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में साहसिक खेलों के क्षेत्र में सक्रिय संस्था इंट्रिसिक क्लाइंबर्स एंड एक्सप्लोरर्स (आईस) के दो प्रशिक्षकों मुकेश और लोकेश ने लद्दाख की तीन चुनौतीपूर्ण ऊंची चोटियों को सफलतापूर्वक फतह कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। दोनों पर्वतारोहियों ने कठिन मौसम, बेहद कम ऑक्सीजन और तकनीकी चढ़ाई जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए अभियान पूरा किया। आईस संस्था के अध्यक्ष विश्वदेव पांडेय वासू और सचिव जगदीश कलौनी ने बताया कि हाई-एल्टीट्यूड माउंटेनियरिंग के क्षेत्र में मुकेश और लोकेश की यह उपलब्धि संस्था के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों प्रशिक्षकों ने लद्दाख की दुर्गम चोटियों पर सफल चढ़ाई कर अपने अनुभव और तकनीकी दक्षता का परिचय दिया।
तीन ऊंची चोटियों पर सफल चढ़ाई
अभियान के दौरान मुकेश और लोकेश ने 6,440 मीटर ऊंची माउंट कांग यातसे-I, 6,300 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो वेस्ट और 6,250 मीटर ऊंची माउंट ज़ोजोंगो ईस्ट पर चढ़ाई की। इन तीनों चोटियों को उनकी ऊंचाई, कठिन भूभाग और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के कारण पर्वतारोहियों के लिए कठिन माना जाता है। इतनी ऊंचाई पर अभियान के दौरान कम ऑक्सीजन, मौसम में अचानक बदलाव और तकनीकी चढ़ाई जैसी परिस्थितियां पर्वतारोहियों की क्षमता और अनुभव की परीक्षा लेती हैं। मुकेश और लोकेश आईस संस्था में प्रशिक्षक के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। हाई-एल्टीट्यूड माउंटेनियरिंग का उनका अनुभव इस अभियान में भी काम आया। संस्था के अनुसार, दोनों की सफलता से स्थानीय स्तर पर साहसिक खेलों और पर्वतारोहण से जुड़े युवाओं को भी प्रेरणा मिलेगी।
साहस, अनुशासन और दृढ़ संकल्प का परिचय
लद्दाख की तीन ऊंची चोटियों की सफल चढ़ाई ने दोनों प्रशिक्षकों के पर्वतारोहण कौशल को सामने रखा है। कठिन परिस्थितियों में अभियान को पूरा करने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ तकनीकी प्रशिक्षण, अनुभव, अनुशासन और मानसिक मजबूती की आवश्यकता होती है। आईस संस्था लंबे समय से पिथौरागढ़ में साहसिक खेलों, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रशिक्षण और गतिविधियों का आयोजन करती रही है। संस्था से जुड़े प्रशिक्षक इससे पहले भी एवरेस्ट समेत कई दुर्गम चोटियों पर अभियान कर चुके हैं।
पुरमल सिंह धर्मशत्तू की स्मृति में साइकिल यात्रा
इसी क्रम में संस्था की ओर से प्रसिद्ध पर्वतारोही स्वर्गीय पुरमल सिंह धर्मशत्तू की स्मृति में एक साइकिल यात्रा भी प्रस्तावित है। आईस के दो अन्य प्रशिक्षक पवन और शुभम् दारमा घाटी क्षेत्र तक साइकिल से यात्रा करेंगे। यह यात्रा पिथौरागढ़ में करीब 1,625 मीटर की ऊंचाई से शुरू होकर सीपू गांव में 3,500 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचेगी। लगभग 364 किलोमीटर की इस यात्रा को छह रात और सात दिन में पूरा करने की योजना है। यात्रा का उद्देश्य साहसिक गतिविधि के साथ सामाजिक जागरूकता का संदेश देना भी है। इसके लिए ‘नशे से रहें दूर, जीवन संवारें भरपूर’ और ‘आपदा से आगे, उम्मीद की सवारी’ जैसे संदेश रखे गए हैं।
साहसिक खेलों के साथ सामाजिक सरोकार
आईस संस्था की गतिविधियों में पर्वतारोहण और साहसिक खेलों के साथ पर्यावरण संरक्षण तथा आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण भी शामिल हैं। संस्था सीमित संसाधनों के बावजूद समय-समय पर युवाओं और स्थानीय लोगों के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित करती रही है। मुकेश और लोकेश की लद्दाख की तीन चोटियों पर सफलता तथा पवन और शुभम् की प्रस्तावित साइकिल यात्रा संस्था की इन्हीं गतिविधियों की कड़ी हैं। पर्वतारोहण और साइकिलिंग जैसी गतिविधियों के माध्यम से संस्था साहसिक खेलों के साथ सामाजिक जागरूकता के संदेश को भी आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

