
उत्तराखंड में लगातार बारिश के कारण दूसरे दिन भी 150 से अधिक सड़कें बंद रहीं और बुधवार को राज्य में कुल 152 मार्ग बाधित रहे। नैनीताल में 217 एमएम और भीमताल में 161 एमएम बारिश दर्ज की गई, जबकि कई अन्य इलाकों में भी भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ और रुद्रप्रयाग व हरिद्वार में नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर के करीब पहुंच गया। मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी समेत नौ जिलों में यलो अलर्ट जारी करते हुए राज्यभर में गरज-चमक, आकाशीय बिजली और कहीं-कहीं तीव्र से अति तीव्र वर्षा की चेतावनी दी है।
- उत्तराखंड में बारिश का असर, 152 सड़कें बंद; नौ जिलों में यलो अलर्ट
- नैनीताल में 217 एमएम बारिश, कई जिलों में बढ़ा बारिश का खतरा
- भारी बारिश से जनजीवन प्रभावित, नदियों का जलस्तर खतरे के करीब
- उत्तराखंड में मौसम फिर बिगड़ा, पर्वतीय जिलों में सतर्कता बढ़ी
देहरादून। उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार हो रही बारिश ने जनजीवन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश में लगातार दूसरे दिन 150 से अधिक सड़कें बंद रहीं। बुधवार को राज्य में कुल 152 सड़क मार्ग यातायात के लिए बाधित रहे। इससे पर्वतीय क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और कई स्थानों पर लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। दूसरी ओर, मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के नौ जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। राज्य के सभी जनपदों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली और वर्षा के तीव्र से अति तीव्र दौर की चेतावनी भी दी गई है।
152 सड़कें अब भी बंद
लगातार बारिश के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में सड़कें बंद होने का सिलसिला जारी है। मंगलवार को राज्य में 172 सड़कें बंद थीं। बुधवार को स्थिति में कुछ सुधार जरूर हुआ, लेकिन इसके बावजूद 152 सड़कें यातायात के लिए बंद रहीं। सड़कें बंद होने से पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रामीणों, स्थानीय लोगों और अन्य यात्रियों को आवागमन में परेशानी उठानी पड़ रही है। बुधवार को अल्मोड़ा में आठ, बागेश्वर में 15, चमोली में 21, देहरादून में 11, नैनीताल में 47, पौड़ी में आठ, पिथौरागढ़ में 15, रुद्रप्रयाग में 10, टिहरी में 11 और उत्तरकाशी में छह सड़क मार्ग बंद रहे।
सबसे अधिक 47 सड़कें नैनीताल जिले में बाधित रहीं। चमोली में भी 21 मार्ग बंद होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ी हैं। बारिश के कारण सड़क मार्गों के बाधित होने का असर स्थानीय परिवहन और दैनिक गतिविधियों पर भी पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में लोगों को वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण बंद मार्गों को खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन मौसम खराब रहने की स्थिति में सड़क बहाली का काम प्रभावित होने की आशंका भी बनी हुई है।
नैनीताल में 217 एमएम बारिश
पिछले 24 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश दर्ज की गई। नैनीताल में सबसे अधिक 217 एमएम बारिश हुई। भीमताल में 161 एमएम बारिश दर्ज की गई। हल्द्वानी में भी 122.2 एमएम बारिश हुई, जबकि मुक्तेश्वर में 107.7 एमएम वर्षा दर्ज की गई। बेतालघाट में 80.5 एमएम, चंपावत में 74 एमएम और लोहाघाट में 41.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। रुद्रप्रयाग में 41.2 एमएम तथा रानीखेत में 41.1 एमएम बारिश हुई। इन इलाकों में लगातार वर्षा के कारण स्थानीय जनजीवन प्रभावित हुआ है। नैनीताल और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश का असर सड़क यातायात पर भी पड़ा है। जिले में 47 मार्गों के बंद होने की स्थिति सामने आई है। बारिश की तीव्रता को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
अलकनंदा, मंदाकिनी और गंगा का जलस्तर बढ़ा
लगातार बारिश का असर प्रदेश की प्रमुख नदियों के जलस्तर पर भी दिखाई दे रहा है। रुद्रप्रयाग में अलकनंदा और मंदाकिनी नदियों का जलस्तर खतरे के स्तर के करीब पहुंच गया है। वहीं, हरिद्वार में गंगा नदी का जलस्तर भी खतरे के निशान के करीब पहुंचने की स्थिति में है। नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण नदी किनारे रहने वाले लोगों और संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। लगातार बारिश होने पर नदियों के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए नदी किनारे तथा संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों पर निगरानी बनाए रखना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
नौ जिलों में यलो अलर्ट
मौसम विभाग ने गुरुवार को प्रदेश के नौ जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, चंपावत, ऊधमसिंह नगर, पिथौरागढ़ और बागेश्वर शामिल हैं। इन जिलों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से देहरादून, टिहरी और उत्तरकाशी जैसे पर्वतीय जिलों में बारिश का असर अधिक रहने की आशंका है। चमोली, नैनीताल, चंपावत और ऊधमसिंह नगर में भी कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
राज्यभर में आकाशीय बिजली की चेतावनी
मौसम विभाग ने केवल नौ जिलों तक ही चेतावनी सीमित नहीं रखी है। राज्य के सभी जनपदों में गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के तीव्र से अति तीव्र दौर की संभावना जताई गई है। कई स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा या गर्जन के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। ऐसे मौसम में विशेष रूप से खुले स्थानों, नदी-नालों और पहाड़ी ढलानों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश के कारण सड़कें बंद होने, भूस्खलन और आवागमन बाधित होने की आशंका बनी रहती है।
पर्वतीय जिलों में बढ़ी चुनौती
उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में बारिश के दौरान सड़क मार्गों का बाधित होना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है। कई सड़कें भूस्खलन, मलबा आने या अन्य कारणों से बंद हो जाती हैं। एक मार्ग बंद होने के बाद कई बार आसपास के गांवों और कस्बों का संपर्क प्रभावित हो जाता है। इस समय अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, नैनीताल, पौड़ी, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, टिहरी और उत्तरकाशी समेत कई जिलों में सड़कें बंद हैं। नैनीताल में 47 और चमोली में 21 मार्गों का बंद होना बारिश के व्यापक प्रभाव को दर्शाता है।
लोगों को सतर्क रहने की सलाह
मौसम विभाग की चेतावनी के बीच लोगों से मौसम की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचने और विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को सड़क और मौसम की स्थिति की जानकारी लेकर ही निकलने की जरूरत है।लगातार बारिश के कारण पहले से बंद सड़कों की संख्या में कमी आने के बावजूद प्रदेश में अभी भी 150 से अधिक मार्ग बाधित हैं। ऐसे में अगले कुछ दिनों के मौसम पर सड़क यातायात और जनजीवन की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी। यदि बारिश का दौर इसी तरह जारी रहा तो बंद सड़कों की संख्या बढ़ने और नदियों के जलस्तर में और वृद्धि होने की आशंका बनी रहेगी।





