
बिलासपुर के मसांगंज इलाके में सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद दो समुदायों के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। दोनों पक्षों की ओर से हुई जमकर पत्थरबाजी में 50 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है, जबकि स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। तनाव को देखते हुए बिलासपुर और आसपास के जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने देर रात तक स्थिति पर नजर बनाए रखी।
- सोशल मीडिया टिप्पणी से भड़का विवाद, बिलासपुर में दो पक्ष आमने-सामने
- मसांगंज में जमकर पत्थरबाजी, 50 से ज्यादा लोग घायल
- विवाद के बाद बिगड़े हालात, पुलिस ने किया लाठीचार्ज और छोड़े आंसू गैस के गोले
- बिलासपुर में देर रात तक तनाव, संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में सोशल मीडिया पर की गई एक कथित टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प और सांप्रदायिक तनाव में बदल गया। कोतवाली थाना क्षेत्र के मसांगंज इलाके में दो समुदायों के बीच विवाद के बाद दोनों पक्षों की ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई। घटना में 50 से अधिक लोगों के घायल होने की सूचना है। हालात बिगड़ने पर पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव की स्थिति को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
शुरुआती जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम और फेसबुक पर की गई कथित टिप्पणियों को लेकर हुई। बताया जा रहा है कि मवेशियों से संबंधित कुछ टिप्पणियों को लेकर एक समुदाय के लोगों में नाराजगी पैदा हुई। सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विवाद धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर पहुंच गया और इसके बाद आमने-सामने की स्थिति बन गई। बताया जा रहा है कि तनाव उस समय और बढ़ गया जब हिंदू संगठन से जुड़े चार युवक मसांगंज इलाके से गुजर रहे थे। आरोप है कि रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि इसी दौरान सोहेल खान और कुछ अन्य लोगों ने अक्षत सिंह तथा उनके एक साथी के साथ मारपीट की। घटना के बाद युवकों ने इसकी जानकारी अपने संगठन से जुड़े लोगों को दी।
मारपीट की जानकारी फैलने के बाद हिंदू संगठन से जुड़े बड़ी संख्या में लोग मसांगंज इलाके में पहुंच गए। देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसके बाद विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी शुरू हो गई। अचानक हुई हिंसा के कारण इलाके में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर जमा हो गए। पत्थरबाजी की घटना में दोनों पक्षों के 50 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों को उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया। हिंसा के दौरान कई लोगों को चोटें आईं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
हालात लगातार बिगड़ते देख पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। इसके साथ ही भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, लेकिन इलाके में काफी देर तक तनाव बना रहा। घटना की जानकारी मिलते ही बिलासपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह और कलेक्टर संजय अग्रवाल ने घटनास्थल का जायजा लिया और अधिकारियों से स्थिति की जानकारी ली। वरिष्ठ अधिकारियों ने देर रात तक मौके पर रहकर हालात पर नजर बनाए रखी।
तनाव को देखते हुए बिलासपुर जिले के अलग-अलग थानों से पुलिसकर्मियों को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया। इसके अलावा एहतियात के तौर पर आसपास के जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। संवेदनशील इलाकों में रातभर पुलिस की सघन गश्त जारी रही, ताकि किसी भी तरह की दोबारा हिंसा या अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस और प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों ने लोगों से किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास नहीं करने और बिना पुष्टि के सोशल मीडिया पर किसी सूचना को साझा नहीं करने को कहा है। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
#WATCH | Chhattisgarh | A clash broke out between two groups in Bilaspur, which further escalated into stone pelting. Police deployed to control the crowd. pic.twitter.com/MEMbQiCuB9
— ANI (@ANI) August 29, 2026
अधिकारियों के मुताबिक, घटना के पीछे रहे विवाद के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। सोशल मीडिया पर की गई कथित टिप्पणियों से लेकर उसके बाद हुई मारपीट और पत्थरबाजी तक पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि हिंसा में कौन-कौन लोग शामिल थे और विवाद किस तरह तेजी से बढ़ा। घटना के बाद मसांगंज और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई। पुलिसकर्मियों ने रातभर गश्त कर स्थिति पर नजर रखी। प्रशासन की प्राथमिकता इलाके में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना रही। वरिष्ठ अधिकारी भी लगातार पुलिस बल के साथ संपर्क में रहे।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ विवाद इतनी तेजी से हिंसक रूप लेने से पुलिस और प्रशासन भी सतर्क हो गया है। फिलहाल इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और किसी भी नए विवाद की स्थिति को रोकने के लिए पुलिस बल को अलर्ट रखा गया है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ हिंसा की वास्तविक वजह, इसमें शामिल लोगों और घटना के पूरे क्रम को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।






