
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड से मौतों का आंकड़ा 163 तक पहुंच गया है और 133 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना है। लापता लोगों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालु और विभिन्न राज्यों के पर्यटक शामिल हैं। संचार व्यवस्था बाधित होने के बीच भारतीय दूतावास और राज्यों ने फंसे लोगों तथा उनके परिजनों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की हैं।
- नेपाल में अचानक आई बाढ़ से भारी तबाही, भारतीय पर्यटकों की बढ़ी चिंता
- कैलाश मानसरोवर यात्रियों समेत कई भारतीय नेपाल में फंसे, संपर्क टूटा
- नेपाल बाढ़: तमिलनाडु के 37 और बंगाल के 32 पर्यटकों का पता नहीं
- भारतीय दूतावास समेत कई राज्यों ने जारी किए 24 घंटे के हेल्पलाइन नंबर
देहरादून। नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। फ्लैश फ्लड के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 163 हो गई है, जबकि 133 से अधिक भारतीय नागरिकों के लापता होने की सूचना सामने आई है। इनमें तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल से नेपाल यात्रा पर गए पर्यटकों के अलावा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कई श्रद्धालु भी शामिल हैं। प्रभावित क्षेत्रों में संचार नेटवर्क बाधित होने और कई मार्ग बंद होने के कारण राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ लापता लोगों से संपर्क स्थापित करने में भी मुश्किलें आ रही हैं।
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में फंसे या प्रभावित भारतीय नागरिकों तथा उनके परिजनों की सहायता के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। इसके साथ ही तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, सिक्किम, ओडिशा, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों ने अपने स्तर पर हेल्पलाइन और कंट्रोल रूम सक्रिय किए हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों की बढ़ी चिंता
प्रभावित भारतीयों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की संख्या भी उल्लेखनीय है। सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल एजेंसी के अनुसार, कम से कम 59 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्रियों में शामिल हो सकते हैं। हालांकि, संचार व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं होने के कारण अधिकारियों के पास अभी पूरी और अंतिम जानकारी उपलब्ध नहीं है।
तमिलनाडु के 37 पर्यटकों का पता नहीं
तमिलनाडु के अधिकारियों के अनुसार, नेपाल यात्रा पर गए राज्य के 57 पर्यटकों में से 37 का अभी तक पता नहीं चल पाया है, जबकि 20 लोगों के सुरक्षित होने या उनके बारे में जानकारी मिलने की पुष्टि हुई है। बताया गया है कि यह समूह हिमालय क्षेत्र में एक मंदिर की ओर जा रहा था, इसी दौरान अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
इसी बीच कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन ने भी नेपाल में उसके 77 सदस्यों के लापता होने की जानकारी दी है। संगठन के अनुसार, नेपाल के एक इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद इन लोगों से संपर्क नहीं हो पाया। वहीं, 495 सदस्य सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। नेपाल सरकार की ओर से भी इमिग्रेशन सेंटर के पूरे स्टाफ के संपर्क से बाहर होने की जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल के 32 सदस्यीय समूह से संपर्क टूटा
पश्चिम बंगाल के 32 लोगों का एक समूह भी बाढ़ के बाद लापता बताया जा रहा है। इसमें 30 पर्यटक और दो टूर मैनेजर शामिल हैं। यह समूह 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। समूह बुधवार सुबह तिब्बत में प्रवेश करने के लिए रसुवागढ़ी पहुंचा था। बताया गया है कि सुबह करीब 8:30 बजे वे इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे, तभी नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में अचानक बाढ़ आ गई। इसके बाद समूह के किसी भी सदस्य से संपर्क नहीं हो पाया। कोलकाता के अलावा हुगली के चंदननगर और उत्तर 24 परगना के बारासात के निवासी भी इस समूह में शामिल बताए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल सरकार ने प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए कोलकाता में राज्य पुलिस मुख्यालय में हेल्पलाइन शुरू की है।
पश्चिम बंगाल हेल्पलाइन: 033-24793311 / 9147890181
उत्तर प्रदेश के लोग भी नेपाल में फंसे
उत्तर प्रदेश के कई लोगों के नेपाल में फंसे होने की आशंका है। किसान नेता राकेश टिकैत के भी अपने साथियों के साथ पोखरा में फंसे होने की खबर है। एक वीडियो संदेश में उन्होंने बताया कि हालात सामान्य नहीं होने के कारण सड़क मार्ग से यात्रा करना संभव नहीं था। उन्होंने काठमांडू तक उड़ान से जाने और वहां से दिल्ली के लिए उड़ान लेने की योजना की जानकारी दी। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय ने नेपाल में फंसे अपने रिश्तेदारों के संबंध में जानकारी चाहने वाले लोगों से राज्य हेल्पलाइन पर संपर्क करने की अपील की है।
उत्तर प्रदेश हेल्पलाइन: 1070
महाराष्ट्र के सात पर्यटक प्रभावित
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के बाद महाराष्ट्र के सात पर्यटकों के फंसे होने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार, इनमें से चार लोगों से संपर्क स्थापित हो गया है और उनके सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है। शेष तीन लोगों से संपर्क करने के प्रयास जारी हैं। इन चार लोगों में मुंबई और पुणे के दो-दो पर्यटक शामिल बताए गए हैं। महाराष्ट्र सरकार ने अन्य संभावित प्रभावित लोगों की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंत्रालय में 24 घंटे संचालित होने वाला कंट्रोल रूम बनाया है।
महाराष्ट्र हेल्पलाइन: 1070 / +91-9321587143
ईमेल: controlroom@maharashtra.gov.in
केरल के 36 लोगों का समूह सुरक्षित
केरल के अधिकारियों के अनुसार, नेपाल में यात्रा कर रहे 36 लोगों का एक समूह सुरक्षित है और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर है। राज्य सरकार ने आपातकालीन सहायता के लिए NORKA-Roots के माध्यम से हेल्पडेस्क शुरू किया है।
हेल्पलाइन: 1800-425-3939
विदेश से: +91-8802012345
केरल CMO: 9447111844 / 9747132147
सिक्किम और ओडिशा ने भी शुरू की व्यवस्था
सिक्किम सरकार ने नेपाल में फंसे या प्रभावित हो सकने वाले राज्य के लोगों के परिजनों के लिए हेल्पलाइन शुरू की है।
सिक्किम हेल्पलाइन: 03592-201145 / 03592-202461 / 03592-202256
ओडिशा सरकार ने नई दिल्ली में कंट्रोल रूम स्थापित किया है। सरकार के अनुसार अभी तक ओडिशा के किसी व्यक्ति के लापता होने की जानकारी नहीं मिली है। प्रभावित लोगों की सहायता के लिए प्रीतिश पांडा को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
ओडिशा हेल्पलाइन: +91-7428135044 / +91-8527580245 / 011-23012807
उत्तराखंड के लिए भी हेल्पलाइन जारी
नेपाल में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने भी राज्य के लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। यदि उत्तराखंड का कोई व्यक्ति नेपाल में फंसा है या उसके संबंध में जानकारी नहीं मिल रही है तो परिजन राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।
उत्तराखंड SEOC: 0135-2710334 / 0135-2710335 / 0135-2664314 / 0135-2664315 / 0135-2664316 / 8218867005
टोल-फ्री आपदा हेल्पलाइन: 1070
भारतीय दूतावास ने जारी किए नंबर
काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने नेपाल में बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर जारी किए हैं। इन नंबरों के माध्यम से लापता या फंसे हुए लोगों के संबंध में जानकारी साझा की जा सकती है।
भारतीय दूतावास हेल्पलाइन:
+977-9851316807
+977-9709107500
संचार बाधित होने से स्थिति स्पष्ट नहीं
नेपाल के कई बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में संचार नेटवर्क ठप होने के कारण अभी लापता और प्रभावित भारतीयों की पूरी संख्या स्पष्ट नहीं है। भारतीय दूतावास, राज्य सरकारें और स्थानीय नेपाली प्रशासन आपसी समन्वय के साथ फंसे लोगों तक पहुंचने और उनसे संपर्क स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे संचार व्यवस्था बहाल होगी और नई जानकारी सामने आएगी, लापता या सुरक्षित लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है।





