
सपना जैन संजू का बाल कहानी संग्रह ‘सचमुच का परी देश’ बच्चों के मनोरंजन के साथ-साथ प्रकृति प्रेम, दया, करुणा, अहिंसा, सह-अस्तित्व और आदर्श संस्कारों की सीख देता है। 20 चित्रमय कहानियों से सजा यह संग्रह रोचक, ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक और शिक्षाप्रद है।
- ‘सचमुच का परी देश’ में संस्कारों और प्रकृति प्रेम की खुशबू
- बाल कहानियों का रोचक और ज्ञानवर्धक संग्रह ‘सचमुच का परी देश’
- बच्चों के लिए मनोरंजन और सीख का सुंदर संसार
- सपना जैन संजू की कहानियों में संस्कारों की सरगम
सुनील कुमार माथुर
कहानियां न केवल मनोरंजन का सर्वश्रेष्ठ साधन होती हैं, अपितु बच्चों के सम्पूर्ण व्यक्तित्व के निर्माण की पाठशालाएं होती हैं, जिन्हें अंगीकार कर बच्चे प्रगति के पथ पर चलकर अपने लक्ष्यों को हासिल करते हैं। लेखिका सपना जैन संजू ने रोचक बाल कहानियों के इस संग्रह के माध्यम से बच्चों को प्रकृति से जोड़ने, आपसी सामंजस्य स्थापित करने, दया, करुणा, अहिंसा, सह-अस्तित्व की भावना जागृत करने का अनोखा व अद्भुत प्रयास किया है, जो वंदनीय व सराहनीय है।
‘सचमुच का परी देश’, ‘अपने जैसा मन’, ‘चलो पिकनिक पर’, ‘सांच को आंच नहीं’, ‘बंदर ने देखा वीडियो’, ‘टप टपाक’, ‘हंसमुख लड्डू जी’, ‘जादूगर का जादू’ जैसी 20 चित्रमय कहानियों के माध्यम से प्रकृति प्रेम से भरपूर सुंदर संसार समर्पित किया है।
सभी कहानियां भरपूर मनोरंजक, ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायक व शिक्षाप्रद हैं, जो गागर में सागर भरने में सहायक सिद्ध हुई हैं। लेखिका सपना जैन संजू ने ‘सचमुच का परी देश’ नामक यह रोचक बाल कहानियों का संग्रह अपनी मां को समर्पित किया है। लेखिका सपना जैन की बचपन से ही लेखन के प्रति रुचि रही है। यही वजह है कि उनकी रचनाएं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती ही रहती हैं। उत्कृष्ट साहित्य सृजन के लिए वे अनेक बार सम्मानित भी हो चुकी हैं। आदर्श संस्कारों से महकती बाल कहानियां वास्तव में साहित्य का एक अद्भुत गुलदस्ता हैं। उक्त पुस्तक राजस्थान साहित्य अकादमी के आर्थिक सहयोग से प्रकाशित हुई है।
पुस्तक की छपाई, गेटअप, मेकअप काफी अच्छा है और कागज भी उत्तम क्वालिटी का है। मुखपृष्ठ बड़ा ही आकर्षक है। सपना जी द्वारा बाल कहानियों का संग्रह ‘सचमुच का परी देश’ ने यह साबित कर दिया है कि सपना जी का सपना साकार हुआ और उन्होंने अपने नाम की सार्थकता को सिद्ध कर दिया।
लेखिका — सपना जैन संजू
पृष्ठ — 80
मूल्य — 250 रुपये
प्रकाशक — इंडिया नेटबुक्स प्राइवेट लिमिटेड सी-122, सेक्टर-19, नोएडा — 201301
समीक्षक — सुनील कुमार माथुर
सदस्य अणुव्रत लेखक मंच एवं
स्वतंत्र लेखक व पत्रकार
33 वर्धमान नगर, शोभावतों की ढाणी, खेमे का कुआं, पाल रोड, जोधपुर, राजस्थान







