
बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद चमोली पुलिस ने जांच तेज कर दी है। मामले की विवेचना के लिए एसआईटी गठित कर आरोपी कर्मचारी की कॉल डिटेल, ईमेल, बैंक खातों और सीसीटीवी फुटेज की जांच शुरू कर दी गई है। वहीं बीकेटीसी से घटना से जुड़े कई बिंदुओं पर जवाब तलब किया गया है और स्थानीय संगठनों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
- चढ़ावा हेराफेरी मामले में एसआईटी एक्शन मोड में, तकनीकी साक्ष्य जुटाने पर जोर
- आरोपी कर्मचारी की सीडीआर, ईमेल और बैंक लेनदेन की होगी जांच
- बीकेटीसी से मांगे गए जवाब, प्राथमिकी दर्ज कराने वाले कर्मचारी का बयान आज
- बदरीनाथ चढ़ावा विवाद में निष्पक्ष जांच की मांग तेज, दोषियों पर सख्त कार्रवाई की उठी आवाज
चमोली। बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच प्रक्रिया और तेज हो गई है। चमोली पुलिस ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और व्यापक जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। जांच एजेंसी अब आरोपी कर्मचारी की गतिविधियों, वित्तीय लेनदेन और तकनीकी रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि कथित हेराफेरी किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं रही।
पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट के पर्यवेक्षण में गठित एसआईटी में बदरीनाथ थानाध्यक्ष निरीक्षक महादेव उनियाल को विवेचना अधिकारी नियुक्त किया गया है। टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक प्रकाश बिष्ट, लंगासू चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक दिनेश पंवार तथा स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के दो कर्मियों को भी शामिल किया गया है। टीम बदरीनाथ धाम और संबंधित स्थानों से दस्तावेजी तथा तकनीकी साक्ष्य एकत्र करने में जुटी हुई है। जांच के दौरान पुलिस आरोपी कर्मचारी की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), ईमेल संचार, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच कर रही है। इसके साथ ही मंदिर परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है, ताकि घटना के समय की गतिविधियों और संबंधित व्यक्तियों की आवाजाही का स्पष्ट विवरण सामने आ सके।
पुलिस उपाधीक्षक मदन सिंह बिष्ट ने बताया कि एसआईटी को मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। तकनीकी, वित्तीय और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि कथित हेराफेरी किस प्रकार हुई, इसमें किन परिस्थितियों ने भूमिका निभाई और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी संलिप्तता रही है। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच प्रक्रिया के तहत एसआईटी ने बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) से भी घटना से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने समिति को आठ से दस सवाल भेजे हैं, जिनका संबंध घटना की परिस्थितियों, सुरक्षा व्यवस्था और दान प्रबंधन प्रणाली से है। इसके अलावा प्राथमिकी दर्ज कराने वाले बीकेटीसी कर्मचारी युद्धवीर पुष्पवान को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया है, ताकि घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके।
उधर, बदरीनाथ धाम से जुड़े सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। बदरीश संयुक्त संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को ज्ञापन भेजकर पूरे प्रकरण की एसआईटी से निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। समिति का कहना है कि मामले में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। समिति ने यह भी आरोप लगाया है कि वर्तमान यात्रा सीजन के दौरान बीकेटीसी और अन्य एजेंसियों से जुड़े कुछ कर्मचारियों द्वारा श्रद्धालुओं से दर्शन के नाम पर धनराशि वसूलने की शिकायतें भी सामने आई हैं। उनका कहना है कि ऐसी घटनाएं बदरीनाथ धाम की गरिमा और श्रद्धालुओं के विश्वास को प्रभावित करती हैं। समिति ने सरकार से पूरे प्रकरण में पारदर्शी जांच कर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है।





